Vishram Goswami की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

अंडा करी - एक इश्क बेजुबां

by vishram goswami
  • (4/5)
  • 9.1k

बात उन दिनों की है जब मैं गांव के पास के कस्बे खेड़ली से सीनियर सेकेंडरी (इंटरमीडिएट) परीक्षा पास ...

POEM

by vishram goswami
  • (5/5)
  • 7.7k

कुछ पल कभी-कभी कुछ पल मन को, बहुत दूर ले जाते हैं परिचित सी मधुर आवाजों से, मीठा ...

कुलटा

by vishram goswami
  • 6.7k

गर्मियों की छुट्टियों में जब मैं अक्सर मेरे घर पर होता था रात्रि भोजन के पश्चात करीब 8:00 बजे ...

पापा कहां थे आप

by vishram goswami
  • (5/5)
  • 8.2k

पापा कहां थे आप पतझड़ का मौसम था। पेड़ों के पीले पड़े ...

लाड़ो की विदा

by vishram goswami
  • (4/5)
  • 7.6k

लाड़ो की विदा आज पंडित जी के घर में बड़े ...

आत्महत्या

by vishram goswami
  • (4.5/5)
  • 10k

आत्महत्या उन दिनों मैं एक शहर के विद्यालय में ...

तेरे बिना

by vishram goswami
  • (4.4/5)
  • 7.9k

तेरे बिना दूसरी मंजिल पर रास्ते की ओर बने अपने कक्ष में बिस्तर पर पड़ी दिव्या, अपने आप को, ...

भाग्यरेखा

by vishram goswami
  • (5/5)
  • 7.9k

भाग्यरेखा अपने घर की बालकनी में बैठा मनोहर, बाहर आंगन में लगे नीम के पेड़ की डाल पर बने ...

तीन बीघा जमीन

by vishram goswami
  • (5/5)
  • 7.9k

तीन बीघा जमीन सायं ढलने लगी थी, खेतीहर किसान अपने खेतों से लौटने लगे थे, चरवाहे भेड़ - बकरियों, ...

तुलसी तेरे आंगन की

by vishram goswami
  • (4.7/5)
  • 10.8k

तुलसी तेरे आंगन की शादी के लाल सुर्ख जोड़े़े में लिपटी , कुछ गहनों से लदी, मेमना सी पलंग ...