sukhvinder Singh Rai की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

ब्रह्मांड की राख

by Sukhwinder Singh Sukhwinder

रात के ठीक 11:43 बज रहे थे। दीवार पर टंगी पुरानी घड़ी के पेंडुलम की आवाज़ उस सन्नाटे में ...

डिजिटलजाल

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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कमरे की सीलन भरी हवा में छत वाले पुराने पंखे की 'कटर-कटर' आवाज़ किसी उल्टी गिनती की तरह गूंज ...

अपने ही हाथों लिखी बर्बादी

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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सड़क के किनारे लगा इकलौता पीला बल्ब बारिश की तेज़ बौछारों के बीच किसी बीमार इंसान की तरह टिमटिमा ...

झूठा रुतबा

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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शहर के उस सबसे महंगे कैफे के बाहर एस्प्रेसो कॉफी और बेक हो रही ब्रेड की महक हवा में ...

​अरेंज मैरिज का संदूक

by Sukhwinder Singh Sukhwinder
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**एपिसोड: बदलते रंग**कहा जाता है कि प्रेम विवाह (लव मैरिज) में इंसान जो रोता है, वह शादी से पहले ...