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अनोखी परीक्षा

by RAMESH SOLANKI

अनोखी_परीक्षा "बेटा! थोड़ा खाना खाकर जा ..!! दो दिन से तुने कुछ खाया ...

अधूरे सिंदूर की पूरी रस्म

by manoj
  • 57

खेतों के बीच से गुजरती वह कच्ची राह, जहाँ लाजो अक्सर अपनी सहेलियों के साथ पानी भरने जाती थी। ...

ईमानदार की विदाई

by A
  • 192

"देखो भाई, इस देश में बेईमान को जेल भेजने का रिवाज पुराना हो गया है, अब हम ईमानदार को ...

मौसम की करवट

by Vijay Erry
  • 183

मौसम की करवटलेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---सर्दियों की पहली हल्की-सी ठंड पड़ चुकी थी। सुबह ...

माँ की ममता

by Vijay Erry
  • 612

माँ की ममतालेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---1. एक छोटी-सी सुबह, बड़ा-सा एहसाससर्दियों की हल्की-हल्की गुनगुनाती ...

अदृश्य रक्षक

by manoj
  • (5/5)
  • 378

​आन्या की आँखें खुलती हैं। कमरा अंधेरे में डूबा है और फर्श पर कपड़ों का ढेर लगा है। उसकी ...

नये साल में हर तरफ खुशियों की बाहर हो

by Yogendrakumar Pandey
  • 444

आज आंग्ल नववर्ष का प्रथम दिवस है। कैलेंडर में पूरे एक साल की तारीख बदलना और नये वर्ष का ...

एक चाय वाला

by Vijay Erry
  • (5/5)
  • 588

──────────────────एक चाय वालालेखक : विजय शर्मा ‘एरी’आड़ा शहर की सबसे टेढ़ी सड़क का नाम है जवाहर मार्ग। सड़क टेढ़ी ...

नया रास्ता

by Rajeev kumar
  • 387

कहीं कोई रास्ता न दिखे फिर भी रास्ता तो निकालना ही पड़ता है। सारे लोग एक दुसरे का मुंह ...

जिंदगी उधार नहीं होती

by PAYAL PARDHI
  • 612

शीर्षक: ज़िंदगी उधार नहीं होतीराहुल के घर में हर सुबह डर के साथ शुरू होती थी।डर इस बात का ...

Phenomenal Pablo: मेरी यात्रा, मेरे सबक

by Omkar Dutta
  • (4/5)
  • 603

कहते हैं हर कहानी की शुरुआत आसान नहीं होती। मेरी भी नहीं थी। मैं वह लड़का था जो सपनों ...

बड़े दिल वाला - भाग - 5

by Ratna Pandey
  • 912

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या वीर के पत्र को पढ़कर भावुक हो गई और मन ही मन अनुराग ...

नयी राह

by Vijay Erry
  • 600

नयी राहHindi Kahani • लगभग 1500 शब्दलेखक – Vijay Sharma Erry---शाम का सूरज गाँव धनपुरा की पगडंडी पर अपने ...

ट्रिपलेट्स भाग 4

by Raj Phulware
  • 492

ट्रिपलेट्स भाग 4लेखक राज फुलवरेअध्याय 8 : अंडरग्राउंड लैब — जहाँ इंसान प्रयोग बन जाते हैंभाग 1 : अंधेरे ...

भगवत गीता जीवन अमृत

by Deepak Bundela
  • 1k

प्रश्न 1: बार-बार असफलता क्यों मिलती है?कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — भगवद गीता 2.47️ फल नहीं, कर्म पर ध्यान ...

रहनुमा

by kirti chaturvedi
  • (4.8/5)
  • 9.3k

रहनुमा आज ईद का दिन था। साहिल नमाज़ पढ़ने गए हुए थे। अंबर घर को सजाने में लगी थी। ...

कृष्ण–अर्जुन

by Raj Phulware
  • (0/5)
  • 1.2k

⭐ कृष्ण–अर्जुनकुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।घोड़ों की हिनहिनाहट, रथों की गड़गड़ाहट,तीरों की वर्षा और रणभूमि की गर्जना—सब ...

डिग्री, लेकिन भविष्य नहीं [Indian Education System]

by Om Prakash
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  • 843

डिग्री के बाद भी बेरोज़गारी(भारतीय शिक्षा व्यवस्था की एक सच्ची कहानी)रमेश एक छोटे से गाँव में पैदा हुआ, जहाँ ...

क़ानून और इंसाफ

by Wajid Husain
  • 570

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीअदालत की खिड़की से हल्की धूप भीतर घुस रही थी। धूप की वह पतली लकीर ...

खोयी हुई चाबी

by Vijay Erry
  • (0/5)
  • 816

खोयी हुई चाबीVijay Sharma Erryसवाल यह नहीं कि चाबी कहाँ खोयी, सवाल यह है कि हमने कब से खुद ...

ट्रिपलेट्स भाग 3

by Raj Phulware
  • 507

ट्रिपलेट्स भाग 3लेखक राज फुलवरेअध्याय 6 : जब आईने आमने-सामने आएभाग 1 : सुनसान फैक्ट्री — टकराव की जगहशहर ...

जहाँ से खुद को पाया - 4 (लास्ट पार्ट)

by vikram kori
  • (0/5)
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Part - 4 लास्ट पार्टसुबह की हवा में हल्की ठंडक थी, लेकिन सयुग के भीतर अजीब सी तपिश थी।‎रात ...

जहाँ से खुद को पाया - 3

by vikram kori
  • 948

‎part - 3‎‎दिल्ली की रातें अब सयुग को डराती नहीं थीं। ‎पहले जिन सड़कों पर चलते हुए उसे अपने ...

अधूरी प्रेम कहानी

by Vijay Erry
  • (0/5)
  • 1k

–––अधूरी प्रेम कहानीलेखक : विजय शर्मा एरीमालगाँव में गर्मियों की दोपहरें इतनी लम्बी होती हैं कि लगता है सूरज ...

ट्रिपलेट्स भाग 2

by Raj Phulware
  • 894

ट्रिपलेट्स भाग 2लेखक राज फुलवरेअध्याय 3 : शहर पर एक ही चेहरे का आतंकभाग 1 : शहर की नींद ...

जगन्नाथ की कृपा और रवि भानुशाली का नया मार्ग

by Ravi Bhanushali
  • 864

पुरी के समुद्र से उठती नम हवा में शंखध्वनि घुली हुई थी। रथयात्रा का समय निकट था और श्रीजगन्नाथ ...

जहाँ से खुद को पाया - 2

by vikram kori
  • (0/5)
  • 1k

PART–2‎‎‎‎दिल्ली की सुबह गाँव की सुबह जैसी नहीं होती। यहाँ सूरज निकलने से पहले ही शोर शुरू हो जाता ...

जहाँ से खुद को पाया - 1

by vikram kori
  • (4.9/5)
  • 2.6k

Part .1‎‎गाँव की सुबह हमेशा की तरह शांत थी। हल्की धूप खेतों पर फैल रही थी, हवा में मिट्टी ...

स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 3

by Sweta Pandey
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हमारा समाज अपने व्यक्तियों की उपलब्धियों एवं सफलता के मानकों का समय-समय पर निर्धारण करता रहता है। कुछ परिस्थितियों ...

बड़े दिल वाला - भाग - 4

by Ratna Pandey
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अभी तक आपने पढ़ा कि बारातियों के बीच वीर अचानक आकर अनुराग से मिला और अनन्या को बधाई देते ...