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Phenomenal Pablo: मेरी यात्रा, मेरे सबक

by Omkar Dutta
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कहते हैं हर कहानी की शुरुआत आसान नहीं होती। मेरी भी नहीं थी। मैं वह लड़का था जो सपनों ...

बड़े दिल वाला - भाग - 5

by Ratna Pandey
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अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या वीर के पत्र को पढ़कर भावुक हो गई और मन ही मन अनुराग ...

नयी राह

by Vijay Erry
  • 336

नयी राहHindi Kahani • लगभग 1500 शब्दलेखक – Vijay Sharma Erry---शाम का सूरज गाँव धनपुरा की पगडंडी पर अपने ...

ट्रिपलेट्स भाग 4

by Raj Phulware
  • 279

ट्रिपलेट्स भाग 4लेखक राज फुलवरेअध्याय 8 : अंडरग्राउंड लैब — जहाँ इंसान प्रयोग बन जाते हैंभाग 1 : अंधेरे ...

भगवत गीता जीवन अमृत

by Deepak Bundela
  • 741

प्रश्न 1: बार-बार असफलता क्यों मिलती है?कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — भगवद गीता 2.47️ फल नहीं, कर्म पर ध्यान ...

रहनुमा

by kirti chaturvedi
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रहनुमा आज ईद का दिन था। साहिल नमाज़ पढ़ने गए हुए थे। अंबर घर को सजाने में लगी थी। ...

कृष्ण–अर्जुन

by Raj Phulware
  • 882

⭐ कृष्ण–अर्जुनकुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।घोड़ों की हिनहिनाहट, रथों की गड़गड़ाहट,तीरों की वर्षा और रणभूमि की गर्जना—सब ...

डिग्री, लेकिन भविष्य नहीं [Indian Education System]

by Om Prakash
  • 450

डिग्री के बाद भी बेरोज़गारी(भारतीय शिक्षा व्यवस्था की एक सच्ची कहानी)रमेश एक छोटे से गाँव में पैदा हुआ, जहाँ ...

क़ानून और इंसाफ

by Wajid Husain
  • 435

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीअदालत की खिड़की से हल्की धूप भीतर घुस रही थी। धूप की वह पतली लकीर ...

खोयी हुई चाबी

by Vijay Erry
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खोयी हुई चाबीVijay Sharma Erryसवाल यह नहीं कि चाबी कहाँ खोयी, सवाल यह है कि हमने कब से खुद ...

ट्रिपलेट्स भाग 3

by Raj Phulware
  • 429

ट्रिपलेट्स भाग 3लेखक राज फुलवरेअध्याय 6 : जब आईने आमने-सामने आएभाग 1 : सुनसान फैक्ट्री — टकराव की जगहशहर ...

जहाँ से खुद को पाया - 4 (लास्ट पार्ट)

by vikram kori
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Part - 4 लास्ट पार्टसुबह की हवा में हल्की ठंडक थी, लेकिन सयुग के भीतर अजीब सी तपिश थी।‎रात ...

जहाँ से खुद को पाया - 3

by vikram kori
  • 864

‎part - 3‎‎दिल्ली की रातें अब सयुग को डराती नहीं थीं। ‎पहले जिन सड़कों पर चलते हुए उसे अपने ...

अधूरी प्रेम कहानी

by Vijay Erry
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  • 933

–––अधूरी प्रेम कहानीलेखक : विजय शर्मा एरीमालगाँव में गर्मियों की दोपहरें इतनी लम्बी होती हैं कि लगता है सूरज ...

ट्रिपलेट्स भाग 2

by Raj Phulware
  • 783

ट्रिपलेट्स भाग 2लेखक राज फुलवरेअध्याय 3 : शहर पर एक ही चेहरे का आतंकभाग 1 : शहर की नींद ...

जगन्नाथ की कृपा और रवि भानुशाली का नया मार्ग

by Ravi Bhanushali
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पुरी के समुद्र से उठती नम हवा में शंखध्वनि घुली हुई थी। रथयात्रा का समय निकट था और श्रीजगन्नाथ ...

जहाँ से खुद को पाया - 2

by vikram kori
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PART–2‎‎‎‎दिल्ली की सुबह गाँव की सुबह जैसी नहीं होती। यहाँ सूरज निकलने से पहले ही शोर शुरू हो जाता ...

जहाँ से खुद को पाया - 1

by vikram kori
  • (4.9/5)
  • 2.3k

Part .1‎‎गाँव की सुबह हमेशा की तरह शांत थी। हल्की धूप खेतों पर फैल रही थी, हवा में मिट्टी ...

स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 3

by Sweta Pandey
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हमारा समाज अपने व्यक्तियों की उपलब्धियों एवं सफलता के मानकों का समय-समय पर निर्धारण करता रहता है। कुछ परिस्थितियों ...

बड़े दिल वाला - भाग - 4

by Ratna Pandey
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अभी तक आपने पढ़ा कि बारातियों के बीच वीर अचानक आकर अनुराग से मिला और अनन्या को बधाई देते ...

सुख की कामना

by Vijay Erry
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सुख की कामनालेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग १५०० शब्दों की कहानी)गाँव का नाम था नंदगाँव। पहाड़ों के बीच बसा यह ...

कर्म नहीं, अंतर

by Raj Phulware
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  • 1.1k

कर्म नहीं, अंतरलेखक राज फुलवरेपुराने समय की बात है। हरे-भरे खेतों, मिट्टी की सोंधी खुशबू और शांत वातावरण से ...

बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोध

by Ganesh Kachhwaha
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शीर्षक : बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोधखंड 1 : बिटिया और पिता — जीवन की ऊर्जाथकान ...

एक अनोखा डर

by Vijay Erry
  • 1.2k

एक अनोखा डरलेखक: विजय शर्मा एरीशब्द संख्या: लगभग १५००रात के दो बज रहे थे। दिल्ली की उस ऊँची इमारत ...

ठहराव में डूबा दिसंबर

by Nensi Vithalani
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  • 1.1k

साल का आख़िरी महीना कोई साधारण महीना नहीं होता। यह सिर्फ़ कैलेंडर का आख़िरी पन्ना नहीं, बल्कि ज़िंदगी का ...

प्रेरक - जीवन अनुभव

by Ganesh Kachhwaha
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सेवानिवृत्ति : जीवन की दूसरी पारी — सृजन का एक सुनहरा अवसरसेवानिवृत्ति का दिन मेरे जीवन का कोई सामान्य ...

8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 2

by ભૂમિકા
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बस धीरे-धीरे विजय चौकड़ी की ओर बढ़ी। अवनी ने खिड़की से बाहर देखा, सड़क के किनारे छोटे-छोटे कैफे, आधुनिक ...

गुप्त धन

by Vijay Erry
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गुप्त धनलेखक: विजय शर्मा एरीशब्द संख्या: लगभग १५००गाँव का नाम था चंदनपुर। पहाड़ों के नीचे बसी यह छोटी-सी बस्ती ...

स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 2

by Sweta Pandey
  • (5/5)
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हमारी मूल प्रवृत्ति क्या है? यही सबसे बड़ा प्रश्न है। इसी के आधार पर हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण होता ...

ज्ञान ज्योति का उदय ( सरस्वती माता की कहानी )

by Raju kumar Chaudhary
  • (4.9/5)
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सरस्वती माता की पवित्र और प्रेरणादायक कहानीज्ञान की जोती जलादे माँ ॥ सरस्वती पुजाएक समय की बात है…जब यह ...