शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 5: “पंखों का रहस्य”[दृश्य 1 – परित्यक्त मंदिर, अर्धरात्रि]टूटा हुआ प्राचीन मंदिर। छत ...
रवीन्द्रनाथ त्यागी हिंदी व्यंग्य परंपरा के आधार प्रतिनिधिविवेक रंजन श्रीवास्तवरवीन्द्रनाथ त्यागी हिंदी व्यंग्य साहित्य की उस गौरवशाली परंपरा के ...
: स्टार-सेंटिनल्स 2 – परछाइयों का सचदृश्य 1 – नई शुरुआतअर्कलाइट अंतरिक्ष की गहराई में आगे बढ़ रहा था। ...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 4: “छाया का षड्यंत्र”[दृश्य 1 – नगर का उत्सव, रात्रि]नगर के मुख्य चौक ...
डिजिटल डेथ ट्रैप: मासूमों की जान और गेम संचालकों का कुत्सितव्यापारलेखक: विवेक रंजन श्रीवास्तवआज के दौर में स्मार्टफोन केवल ...
शीर्षक: वल्चर: पंखों के पीछे का सच[दृश्य 1 – अंधेरे से जन्म]कभी एक साधारण ग्रह था—कायरॉन। वहाँ आसमान हमेशा ...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 3: “राख से उठता शहर”[दृश्य 1 – युद्ध के बाद की सुबह]जली हुई ...
शीर्षक: स्टार-सेंटिनल्स: वल्चर के बाद[दृश्य 1 – शोक की धरती]वल्चर की शहादत के बाद शहर की रातें और भी ...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 2 (बैकस्टोरी): “रक्तपंख का जन्म”[दृश्य 1 – महानगर का पिछड़ा इलाका, प्रातः]टूटी-फूटी झुग्गियाँ। ...
जनजातीय लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन की चुनौतीप्रस्तुतकर्ता: विवेक रंजन श्रीवास्तव(राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित प्रबुद्ध विचारक और अन्वेषक)प्रस्तावनाजनजातीय ...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानविशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”[दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या]लाल सूरज डूब ...
सुभाष चंद्र बोस की पत्नी के बारे में और एक कहानी: वे भारत क्यों न आ सकींसुभाष चंद्र बोस, ...
भूल-111भारत रत्न : सुपात्रों को नजरअंदाज करनासरदार पटेल को सन् 1991 में और डॉ. आंबेडकर को 1990 में ‘भारत ...
[ 11. अक्खड़पन, दूसरों के साथ गलत व्यवहार ]भूल-108मामूली अकादमिक उपलब्धियाँ,महत्त्वपूर्ण मुद्दों की शोचनीय जानकारी, फिर भी...“उसे कुछ नहीं ...
नदी में स्नान भारत बनाम दुनियाविवेक रंजन श्रीवास्तवभारत में नदियों के खुले घाटों पर स्नान की परंपरा अत्यन्त प्राचीन, ...
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: संस्कृति से संविधान तक, (मानस का धोबी के कहने से मां सीता के त्याग का प्रसंग)विवेक ...
व्यंग्यनंबर वन का 'अमृत' और नरक का ड्रेनेजविवेक रंजन श्रीवास्तवइंदौर में इन दिनों गजब का द्वंद्व चल रहा है। ...
श्रद्धासुमन : नमन ज्ञानरंजनविवेक रंजन श्रीवास्तवन्यूयॉर्क सेज्ञानरंजन हिंदी कहानी के उस युग के प्रवर्तक स्वर हैं जिन्होंने “आम आदमी” ...
पितृ दोष : मेरे दृष्टिकोण से।पारम्परिक ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष के नाम पर विधि विधान का प्रावधान है, ...
भूल-85विकृत, स्वार्थपूर्णधर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकवादधर्मनिरपेक्षता राज्य को धर्म से पूरी तरह से अलग करना है। यह राज्यों का प्रतिनिधित्व करनेवाले ...
--- *भारत में शिक्षा * ---- 1- *शिक्षा का महत्व* ----शिक्षा ...
साल दो हजार पच्चीस, दिल्ली की पुरानी गलियों में, जहाँ इतिहास की दीवारें अभी भी फुसफुसाती हैं, एक नई ...
Veer Zara“मैं मर भी जाऊँ तो लोग कहेंगे कि एक हिंदुस्तानी ने पाकिस्तान से इतनी मोहब्बत की कि वह ...
हर चीज़ की एक पहली बार होती है — और कभी-कभी वही “पहली बार” हमें सिखा देती है कि ...
इतना तो चलता है, कितना चलता है भाई, क्यों हम लड़कियों को हर जगह चुप रहने को मजबूर किया ...
मुग़ल शासन कि स्थापना बाबर ने कि थी ज़ब उसे अंदाजा हो गया कि भारत शासन व्यवस्था केंद्रिकृत न ...
भाग-1बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर धीमे-धीमे बज रही थीं। कमरे में बस एक पुराना बल्ब जल रहा ...
पंचगांव नाम का एक सुंदर-सा गांव था, जहां हरियाली, सादगी और अपनापन बसा था। उसी गांव में रहता था ...
अध्याय 2: अतीत की मुस्कान(जब गांव जिंदा थे)पहाड़ों की असली ख़ूबसूरती वहां की वादियों में नहीं — वहां के ...
लेखक - धीरेंद्र सिंह बिष्टअध्याय 1: पहाड़ की पहली दरार(जहां से पलायन शुरू हुआ)देवभूमि उत्तराखंड — जहां हवा में ...