Soni shakya की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

सजा.....बिना कसूर की - 8

by Soni shakya
  • (5/5)
  • 564

और अब ... विदाई की घड़ीयह वो समां होता है जिसमें खुशी भी होती है और दुख भी।हर आंख ...

सजा.....बिना कसूर की - 7

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 1.4k

भूमि के घर पहुंचते ही..सरला ने पश्नों की झड़ी लगा दी।भूमि बोली --चील करो मां !!सब ठीक-ठाक था ।मुलाकात ...

सजा.....बिना कसूर की - 6

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 1.6k

तभी भूमि आते हुए दिखाई देती है।आकाश ऐसे खुश होता है मानो कोई खजाना मिल गया हो।भूमि नेचारों ओर ...

सजा.....बिना कसूर की - 5

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 1.6k

दूसरे दिन ..आज भुमि ऑफिस से थोड़ा जल्दी घर आ गई थी ।4:00 बजे का समय था भूमि अपने ...

सजा.....बिना कसूर की - 4

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 2.1k

वैसे तो आपको देखने से ही और आपकी बातचीत से बहुत-कुछ समझ आता है आपके बारे में फिर भी ...

सजा.....बिना कसूर की - 3

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 2.3k

भूमि सब कुछ इतना आसान नहीं होता बेटा।हमारा समाज आज भी इतना विकसित नहीं है जो घटनाओं को सुनकर ...

सजा.....बिना कसूर की - 2

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 2.8k

भूमि के पिता (सरला ) भूमि की मां की ओर देखते हैं और कहते हैं--क्या हुआ सरला ?क्या भूमि ...

सजा.....बिना कसूर की - 1

by Soni shakya
  • (4.6/5)
  • 4.5k

प्रिया पाठको,,यह एक सामाजिक कहानी है ।जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की ...

राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 8

by Soni shakya
  • (4.9/5)
  • 5.1k

तभी ..अचानक से राधा को बहुत जोर से खासी आती है और वो संभल नहीं पाती तभी,,देव ने देखा ...

राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 7

by Soni shakya
  • (0/5)
  • 3.8k

मैंने गलत किया है क्या देव जो तुम्हें ही सर्वोपरि माना।और .मैंनै तुमसे कुछ मांगा है क्या देव या ...