उधर...जंगल से सैकड़ों किलोमीटर दूर...रात के लगभग दो बजे थे। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। राधा अपने कमरे ...
इधर श्रेया की आँखों से नींद रूठ चुकी थी। करवट बदलते-बदलते उसका मन बार-बार करण की तरफ भाग जाता। ...
चौहान हवेली – रातपूरा घर सो चुका था। हर तरफ सन्नाटा फैला हुआ था। संपूर्णा अपने कमरे में बेड ...
(जंगल में गहरा सन्नाटा छाया है।पेड़ों के बीच से धुंध की परतें निकल रही हैं।18 साल की मासूम सिमरन ...
रात का तीसरा पहर था। बरगद के विशाल पेड़ के नीचे...सिद्धिदात्री गहरी नींद में थी। अनजाने में उसका सिर ...
कुछ दिन बीत गए घर में फिर से एक अजीब सी खामोशी थी। कबीर सुबह अपने कमरे में बैठा ...
ऑफिस का शुरुआती माहौलकांच के बड़े केबिन में विराट बैठा हुआ था।फाइलें खुली थीं, लेकिन उसका ध्यान बार-बार दरवाज़े ...
(काली रात... जंगल के पेड़ों से हवा टकरा रही है। झींगुरों की आवाज़ गूँज रही है।सिमरन करण को किसी ...
सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे गायब हो चुकी थी। जंगल फिर से शांत था। रितांश अब लगभग पूरी तरह ठीक हो ...
तीन दिन आख़िरकार गुज़र ही गए। वे तीन दिन जो श्रेया के लिए सिर्फ़ समय नहीं बल्कि ख़ामोश ज़हर ...