जैसे ही शैलजा कैलाश के सीने से चिपकी थी, अरविंद ने अचानक खड़े होकर कदम बढ़ाए। उसकी हवस और ...
उस दिन के बाद…श्रेया अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी…वो जितना खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करती…उतना ...
(घड़ी में रात के 2 बजे हैं। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ है। कबीर गहरी नींद में सो रहा ...
अगली सुबह, सूरज की किरणें चौहान हाउस के बड़े कमरों में झांक रही थीं। माहौल में एक नई ताजगी ...
अंधकार लोक की धरती काँप रही थी। आकाश में काले बादल गरज रहे थे। एक ओर था— रक्तवंश का ...
जैसे ही शैलजा और कैलाश हवेली में पहुँचे… सब कुछ अचानक गायब हो गया। दीवारें, खिड़कियाँ, लाइट्स — जैसे ...
(सूरज की हल्की किरणें कमरे में प्रवेश कर रही हैं। सीया अभी भी हल्की थकी हुई है। कबीर उसे ...
श्रेया ने आखिरकार हिम्मत जुटाई…वो अकेले ही डॉक्टर के पास पहुंची…दिल में एक अजीब सा डर था…पर चेहरे पर ...
रात गहरी थी। रितांश अकेला पहाड़ की चोटी पर बैठा था। उसकी मुट्ठियाँ भींची हुई थीं। बार-बार उसे वही ...
गंगा जी ने संयोगिता के माता-पिता से बात की। शुरू में वे बहुत हिचकिचाए। उन्हें लगा कि विराट अभी ...