कमरे में हल्की सी खामोशी थी…खिड़की से आती हवा परदे हिला रही थी…दोनों बेड पर बैठे थे…बहुत करीब…पर फिर ...
सुबह का समय। बारिश थमी है। हवेली के बाहर धूप की हल्की किरणें पड़ रही हैं। करण बिस्तर पर ...
आज अग्निहोत्री हाउस पूरी तरह रोशनी से जगमगा रहा था।रितांशी का जन्मदिन था। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों ...
बारिश अब भी हो रही थी…तीनों खिड़की के पास बैठे पकौड़े खा रहे थे…और माहौल हल्का-फुल्का था। तभी…कबीर का ...
चौहान हवेली – रातपूरा हॉल अब भी चुप था। सबकी नजरें विवान पर टिकी थीं।विराट उसके सामने घुटनों के ...
करण अपनी हवेली के ऊपरी कमरे में खड़ा है। रात गहरी और चांदनी बहुत हल्की है। हवेली की खिड़कियों ...
जैसे ही सिद्धिदात्री की नज़र खिड़की पर खड़े कृष्णा और सिद्धिका पर पड़ी...उसका चेहरा एकदम लाल हो गया।आखिर वह ...
तीनों घर पहुँचे…रात काफी हो चुकी थी…बाहर की चहल-पहल अब पीछे छूट चुकी थी। जैसे ही दरवाज़ा खुला…घर की ...
(शाम का वक्त है। हल्की बारिश हो रही है। सड़क किनारे एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सिमरन बैठी ...
काली car धीरे-धीरे चौहान हवेली की गली के पास आकर रुकी। संयोगिता कुछ सेकंड तक बाहर देखती रही। उसी ...