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जिस जीवन में तुम थे - 10

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पाँच वर्ष बीत गए थे।समय के बारे में सबसे विचित्र बात यही है,जिस दिन हम टूटते हैं, उस दिन ...

जिस जीवन में तुम थे - 9

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उस रात वह सो नहीं पाया।अजीब बेचैनी थी।जैसे हृदय किसी ऐसी बात को पहले से जानता हो जिसे बुद्धि ...

जिस जीवन में तुम थे - 8

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इस बार उसने उसे खोला।हाथ काँप रहे थे,दिल भी।पत्र लंबा नहीं था।लेकिन हर पंक्ति जैसे किसी और समय से ...

जिस जीवन में तुम थे - 7

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वह कुछ दिनों से सोच में कई दिन सोचने और काफी दिनों की मुलाकातों के बाद समर आखिर पूछ ...

जिस जीवन में तुम थे - 6

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उस पहली मुलाक़ात के बाद समर कई दिनों तक कोई पत्र नहीं लिख पाया।शब्द, जो इतने महीनों से सहजता ...

जिस जीवन में तुम थे - 5

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सितंबर की शुरुआत थी।वर्ष का वह समय जब पेड़ हरे तो रहते हैं, लेकिन उनकी हरियाली में एक थकान ...

लास्ट सीन एट 11:11

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जुलाई की बारिश दिल्ली को हमेशा थोड़ा उदास बना देती थी।शाम के सात बजे थे। कनॉट प्लेस के एक ...

सफ़ेद शॉल - 2

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तारा बहुत देर तक उस लिफाफ़े को देखती रही।कमरे में केवल टेबल लैम्प की पीली रोशनी थी।घर सो चुका ...

जिस जीवन में तुम थे - 4

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कुछ दिनों बाद समर को एक और पत्र मिला।इस बार कागज़ के साथ एक पुरानी तस्वीर थी।लेकिन तस्वीर में ...

सफ़ेद शॉल - 1

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तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें ...