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अध्याय 19 — मन का मंथन, एक महायात्रा

by Gyan Roshani
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ज्ञान और रोशनी निकल चुके थे अपनी मुहिम पर—एक ऐसी यात्रा पर, जहाँ उन्हें दुनिया के साथ-साथ स्वयं को ...

रावण गाइड - भाग 7 - 2

by Gyan Roshani
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जब अहंकार ने विवेक को हरा दियाशूर्पणखा का अपमान और रावण के भीतर जागता क्रोधरावण अब लंका का शक्तिशाली ...

अध्याय 1: खुद को जानो गहराई से

by Gyan Roshani
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सागर, माया और नियतिमेरे मुख से निकले वचन“सागर मेरी माया, मुकद्दर मेरा, इस समस्त ब्रह्मांड को बनाया मेरे छंद। ...

अध्याय 2: नियति से परे — शिव, शक्ति और स्वयं की खोज

by Gyan Roshani
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सागर, माया और नियतिमेरे मुख से निकले वचन“माया तेरी चाह से मेरा विदमान, कल्पों के सागर में मृत्यों की ...

अध्याय 16 — जब नियति ने पहचान कराई

by Gyan Roshani
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खाना खाने के बाद ज्ञान और रोशनी घर से बाहर टहलने के लिए निकल पड़े। चलते-चलते ज्ञान ने कहा, ...

अध्याय 17 — मन की गहराइयाँ

by Gyan Roshani
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पिछले अध्याय में ज्ञान और रोशनी के बीच एक नई दोस्ती की शुरुआत हो चुकी थी। दोनों ने एक-दूसरे ...

अध्याय 18 — विश्वयात्रा का पहला कदम

by Gyan Roshani
  • 114

रोशनी अपने परिवार की अनुमति मिलने के बाद ट्रेन से ज्ञान के पास पहुँच चुकी थी। स्टेशन पर उतरने ...

माया, मुकद्दर और अनंत अस्तित्व की खोज

by Gyan Roshani
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सूर्य की अंतिम गर्मीएक दार्शनिक रहस्यगाथाप्रस्तावना — वह चेहरा जो दो बार दिखाई दियाआसमान बादलों से ढका हुआ था। ...

अध्याय 15 — वजह

by Gyan Roshani
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ज्ञान को रोशनी पर पूरा सौ प्रतिशत भरोसा था। यह भरोसा आज का नहीं, बल्कि छह-सात साल पुराना था। ...

रावण गाइड - भाग 7 - 1

by Gyan Roshani
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रावण कैसा भी था, रावण था।दुनिया अक्सर किसी व्यक्ति के अंत को देखकर उसके पूरे जीवन का फैसला कर ...