Rishav raj की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

Ghost hunters - 17

by Rishav raj

दोपहर ढल रही थी सूरज की रोशनी पेड़ तक पहुँच तो रही थी लेकिन उसके नीचे खड़े लोगों तक ...

प्यार की परीभाषा - 5

by Rishav raj
  • 462

तुषार के घर में उस दिन माहौल थोड़ा अलग था महेश सुबह से ही खाँस रहे थे। पहले तो ...

Ghost hunters - 16

by Rishav raj
  • 354

हवा अब पहले जैसी नहीं रही थी। उसमें ठंड के साथ एक गंध भी थी जली हुई चीज़ों की ...

प्यार की परीभाषा - 4

by Rishav raj
  • 456

शाम का समय था। घर के बाहर गली में बच्चों की आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन रवीना के घर ...

Ghost hunters - 15

by Rishav raj
  • 444

सुबह अभी पूरी तरह उजली नहीं हुई थी। आसमान हल्का धुंधला था, और गाँव के उस हिस्से में एक ...

प्यार की परीभाषा - 3

by Rishav raj
  • 940

वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भीतर हलचल ...

Ghost hunters - 14

by Rishav raj
  • 732

कुछ भी सामान्य नहीं था पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए और शरीर जैसे आधा ठोस, आधा धुआँकबीर - ...

प्यार की परीभाषा - 2

by Rishav raj
  • (5/5)
  • 1.3k

भाग - 3वो धीरे से उठी और रोज़ की तरह बिना किसी आवाज़ के रसोई में चली गई चूल्हा ...

Ghost hunters - 13

by Rishav raj
  • (5/5)
  • 1.2k

शाम धीरे-धीरे रात में बदल रही थी घर के बाहर अंधेरा गहराने लगा था और अंदर एक अजीब-सी खामोशी ...

प्यार की परीभाषा - 1

by Rishav raj
  • (5/5)
  • 2.2k

ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी ...