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टूटता हुआ मन - भाग 2

by prem chand hembram
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रमेश अपनी पत्नी फरजाना की बेवफाई से भीतर ही भीतर टूट चुका था। कभी हँसी, विश्वास और अपनत्व से ...

खोटा सिक्का - 3

by prem chand hembram
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खोटा सिक्का – भाग 03संध्या का समय था। गौशाला में गायों को चारा दिया जा चुका था। पश्चिम दिशा ...

समस्या नहीं , समाधान की चर्चा

by prem chand hembram
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समस्या नहीं, समाधान की चर्चाजड़ों को सींचने की आवश्यकतासमाज की अनेक समस्याओं पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है—नारी ...

शिक्षा नहीं , मनुष्य निर्माण

by prem chand hembram
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शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी ...

खोटा सिक्का - 2

by prem chand hembram
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चंद रुपयों से न तो पेट भर भोजन मिल सकता था और न ही रेल की टिकट खरीदी जा ...

खोटा सिक्का - 1

by prem chand hembram
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खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो ...

अभी नहीं.....

by prem chand hembram
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अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती ...

এখন নয় ...…

by prem chand hembram
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এখন নয়...গ্রামের প্রান্তে এক বিশাল অশ্বত্থ গাছ দাঁড়িয়ে ছিল। তার বিস্তৃত শাখা-প্রশাখা দূরদূরান্ত পর্যন্ত শীতল ছায়া বিলিয়ে দিত। পাখিদের ...

মন্ত্র বীজ নাম ও মুক্তি

by prem chand hembram
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মন্ত্র, বীজনাম ও মুক্তি — ভারতীয় দর্শনের প্রকৃত দিশা ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য বলে বিবেচিত ...

শ্রী শ্রী ঠাকুরের পঞ্চ নীতি

by prem chand hembram
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মুক্তির পঞ্চনীতি-পথ — শ্রীশ্রী ঠাকুর অনুকূলচন্দ্রের জীবনদর্শন ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য হিসেবে বিবেচিত হয়েছে। সাধারণত ...