रघुनाथ जी की हवेलीनुमा पुरानी हवेली की दीवारें अब सिर्फ ख़ामोशी की गवाही देती थीं। ढलती शाम के साथ ...
हवेली के उस बंद कमरे से हर रात 12:05 बजे एक धीमी घंटी की आवाज़ आती थी। जब शेखर ...
"सौतेली माँ कभी किसी की अपनी नहीं हो सकती, रोहन... वो सिर्फ तुम्हारे पापा के पैसे और इस घर ...
शाम के ढलते ही जब आँगन में पुरानी साइकिल की वही जानी-पहचानी चैन की आवाज़ गूँजती, तो पूरे घर ...
शादी के तीन साल बाद जब नेहा अपने गांव वाले पुश्तैनी घर पहुंची, तो उसकी सांसों में बचपन की ...
रात के 11 बज चुके थे। दिल्ली के एक छोटे से किराए के फ्लैट में लैपटॉप की नीली रोशनी ...