-------------समय -------------वही वक़्त कि लहरें जो अक्सर दिमाग़ मे उठती है। ग्रेवाल एक दम से सोच ने लगा," कया ...
वक़्त कभी किसी का नहीं... मत सोचो, इस मीठी बातो से इसे भरमा लोगे... नहीं कड़वा बोल कर देख ...
51 वा धारावाहिक "अर्थ " कहानी के माधम से जान लो।जिंदगी का मतलब समझ जाओ, तो ये बे अर्थ ...
(एक लकीर का धारावाहिक) परसुत करने को हूँ, मगर ये बात कहने को याद आ गयी बिलकुल टाइम पर। ...
13 वा धारावाहिक आपने आप मे एक अंतरमन की पुकार कह लो, ये काल कोठरी किसे के नसीब मे ...
39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत ...
"समाधी" बैठे कभी धयान लगा है, नहीं न, लगना भी चाहिए, योग तक़ गए हो नहीं ना... जाते कयो ...
एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, ...
परिक्रमा की ही साथ चलती पटरी की तरा है, एक से गाड़ी उतरी दूसरे पड़ चढ़ जाये, तो कहा ...
" टाम जिंदा है ------ 18 वा धारावाहिक --------------"मतलब की आग से जल जाना, हर किसी को आता है.... ...