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सदियों से तुम मेरी - 2

by Krishna bhakt bhajan and art
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सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही ...

Agent Tara - 1

by Krishna bhakt bhajan and art
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मुंबई कभी नहीं सोती.रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए ...

सदियों से तुम मेरी - 1

by Krishna bhakt bhajan and art
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घने जंगल के बीचोंबीच फैली वह प्राचीन गुफा आज भी रहस्यों से भरी थी। चट्टानों से रिसता पानी सदियों ...

वाशिकारिणी - 6

by Krishna bhakt bhajan and art
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इच्छा : प्रेम या प्रेतखाई के किनारे खड़ा शक्ति काँप रहा था।नीचे अंधेरा था… अंतहीन।उसी अंधेरे से एक जानी-पहचानी ...

वाशिकारिणी - 5

by Krishna bhakt bhajan and art
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आईना जो सच नहीं दिखाताशक्ति की चीख किले की दीवारों से टकराकर लौट आई…लेकिन उसकी आवाज़ उसे खुद सुनाई ...

पंखो में बंधा प्रेम

by Krishna bhakt bhajan and art
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पक्षीलोक की सुबह आज कुछ अलग थी।आकाश सामान्य से अधिक उजला था, हवाओं में हल्की सी मिठास थी, और ...

वाशिकारिणी - 4

by Krishna bhakt bhajan and art
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सच का पहला दरवाज़ाउस आदमी की आवाज़ में अजीब सी ठंडक थी।शक्ति उसकी तरफ देखता रहा, जैसे शब्द उसके ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 46

by Krishna bhakt bhajan and art
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अंधकार लोक के विनाश के बाद, जब समस्त लोकों में संतुलन लौट आया, तब आकाश के द्वार एक बार ...

मेरी हो तुम - 3

by Krishna bhakt bhajan and art
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विवेक – अदिति | गहरा रिश्तारात का सन्नाटा चारों ओर फैला था।घर सो चुका था… लेकिन अदिति की आँखों ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 45

by Krishna bhakt bhajan and art
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पुनर्मिलन की शांति अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि आकाश में अचानक काले बादल घिर आए। हवा ...