घर के पीछेबिट्टू की वह आख़िरी फुसफुसाहट "वो आदमी हर रात आपके घर के पीछे खड़ा रहता है" मीरा ...
नील झीलथाने की सीढ़ियाँ उतरते हुए मीरा के पैरों की आहट उस ठंडी, भीगी सुबह में गूँज रही थी।इंस्पेक्टर ...
कागज़ की उम्रसुबह की धुंधली रोशनी जब तीसरी मंज़िल की सीढ़ियों पर फैली, तब मीरा वहीं बैठी हुई थी।उसके ...
पहली रातशीशे पर लिखा वह भयानक शब्द "अगला" बारिश की बूँदों और धुंध के साथ घुलकर धीरे-धीरे नीचे बह ...
डायरीकमरे में सन्नाटा इतना घना था कि हवा में तैरते धूल के कण भी जैसे थम गए थे।मीरा के ...
पत्रसुबह की ठंडी हवा ओस की बूँदों को समेटे हुए हवेली के बरामदे में बह रही थी। मीरा चौखट ...
अध्याय 2 तीसरा दिनदाह-संस्कार के बाद का सन्नाटा मौत के सन्नाटे से भी ज़्यादा ज़हरीला होता है। मौत में ...
वह आखिरी सुबहनीलगढ़ की सुबह कभी रोशनी के साथ नहीं आती थी। यहाँ सवेरा किसी पुराने कैनवास पर बिखरे ...