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श्रापित एक प्रेम कहानी - 87

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश मुस्कान देकर कर जवाब देता है। वर्शाली कुछ सोचती हूई कहती है:" परतुं एकांश जी इस वस्त्र को ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 86

by CHIRANJIT TEWARY
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निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 85

by CHIRANJIT TEWARY
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चतुर आलोक से कहता है:" ये क्या यार यहां पर ताला लगा है। लगता है सभी बाहर हुए है। ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 84

by CHIRANJIT TEWARY
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आलोक की बात को सुनकर वृन्दा गुस्से से एकांश की और दैखकर कहती है।" कोई जरुरत नही है। मैं ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 83

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश कहता है:पता नही यार इस तरह के दवाई के बारे मे मुझे कोई नॉलेज नही है। ये बेहोशी ...

तेरे मेरे दरमियान - 114

by CHIRANJIT TEWARY
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दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है ...

तेरे मेरे दरमियान - 113

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य की और एक टक नजरो से दैखती रहती है आदित्य जानवी से पूछता है --आदित्य :- क्या ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 82

by CHIRANJIT TEWARY
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अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे ...

तेरे मेरे दरमियान - 112

by CHIRANJIT TEWARY
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रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 81

by CHIRANJIT TEWARY
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निलु के मन मे कुम्भन का डर सता रहा था । इसिलिए वो अपना हाथ के रस्सी को जल्दी ...