R B Chavda की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

दिल ने जिसे चाहा - 29

by R. B. Chavda
  • (4.7/5)
  • 606

रुशाली बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।मयूर सर कुछ पल तक उसी जगह खड़े रहे। उन्हें समझ नहीं ...

दिल ने जिसे चाहा - 28

by R. B. Chavda
  • (4.9/5)
  • 1.4k

वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर गया था।रुशाली और मयूर सर, अब भी वैसे ही खड़े थे— इतने ...

दिल ने जिसे चाहा - 27

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.6k

Dr. Kunal तो उस दिन Mayur sir को ये बता कर चले गए थे कि—“शादी में एक बहुत ख़ास ...

दिल ने जिसे चाहा - 26

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.9k

मयुर सर…एक ऐसा नाम जिसे सुनकर अस्पताल के लोग सम्मान से खड़े हो जाते थे।अब वे देश के जाने-माने ...

दिल ने जिसे चाहा - 25

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 1.8k

“कुछ मुलाक़ातें वक्त नहीं, किस्मत तय करती है…”“Excuse me, यहाँ कोई बैठा है क्या?”वो शख्स धीरे-धीरे मुड़ा —और रुशाली ...

दिल ने जिसे चाहा - 24

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 2.5k

पाँच साल का लंबा वक़्त गुजर चुका था।कभी जिन दिनों में मासूमियत, मोहब्बत और सपने भरे थे, अब उन ...

दिल ने जिसे चाहा - 23

by R. B. Chavda
  • (4.9/5)
  • 3.1k

कुछ दिन बाद ...आज का दिन बहुत खास था। मगर रुशाली के लिए ये सुबह किसी और ही अंदाज़ ...

दिल ने जिसे चाहा - 22

by R. B. Chavda
  • (4.9/5)
  • 3k

रुशाली एग्ज़ाम सेंटर से बाहर निकली तो चेहरा चमक रहा था।"थैंक गॉड... पेपर बहुत अच्छा हुआ!" उसने गहरी साँस ...

दिल ने जिसे चाहा - 21

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 3k

रुशाली और मयूर सर की ज़िन्दगी अब पहले जैसी सामान्य लगने लगी थी।कोई बड़ी हलचल नहीं, कोई खास बदलाव ...

दिल ने जिसे चाहा - 20

by R. B. Chavda
  • (5/5)
  • 4.5k

डॉ. मयूर अभी फोन पर रुशाली की माँ से बात कर ही रहे थे जब उन्होंने ये सुना—"रुशाली अभी ...