"स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम ...
प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन पाना, सफलता पाना, सम्मान ...
प्रदर्शन, आधुनिकता और चेतना: गहराई में छिपा रहस्य— Vedanta 2.0आधुनिकता का वास्तविक अर्थ केवल बाहरी स्वतंत्रता, फैशन, तकनीक या ...
स्त्री का “पुरुष बनना”: एक संतुलन की खोजवेदांत 2.0 के नज़रिए सेआज का समाज एक गहरे संक्रमण काल से ...
मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोजभूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है?(अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ...
भारतीय नारीत्व : माँ, पत्नी और महागुरुआधुनिक समानता-वाद स्त्री को पुरुष की नकल बनाने पर तुला है। वह स्त्री ...
अस्तित्व बनाम दावा(“मैं”) : कर्ता की समस्या का नया फ्रेममनुष्य सामान्यतः अपनी आध्यात्मिक उलझनों को “आत्मा बनाम अहंकार”, “ज्ञान ...
**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति ...
परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर ...
त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना ...