गाँव के छोर पर एक विशाल, पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था। कहते हैं कि उसकी जड़ें जितनी ज़मीन ...
सुबह की पहली किरणें जब 'शांतिग्राम' की धूल भरी पगडंडियों पर पड़ती थीं, तो आमतौर पर बैलों की घंटियाँ ...