चलो दूर कहीं.. 21रात के लगभग ग्यारह बजे थे। भोपाल–दिल्ली हाईवे अंधेरे के विशाल समुद्र में एक चमकती हुई ...
चलो दूर कहीं -20रवि के जमीन पर पड़े शरीर से लिपटकर प्रतीक्षा को रोते देख बुत बनी बैठी सुमी ...
चलो दूर कहीं.. 19सुमी की चुप्पी प्रतीक्षा को खाए जा रहा था, प्रतीक्षा की सिसकियां रात के उस निरव ...
चलो दूर कहीं.. 18गहराते रात के साथ उस बीहड़ जंगल की भयावहता भी गहराती जा रही थी और प्रतीक्षा ...
चलो दूर कहीं.. 17प्रतीक्षा घंटों मां के पास बैठी कभी उसका सिर दबाती तो कभी उसका पैर..! मां की ...
चलो दूर कहीं... 16"तेरी मां को टीबी हो गया है बेटा..!" कमलनाथ ने डॉक्टर की पर्ची अपने जेब से ...
चलो दूर कहीं... 15सारा और प्रतीक्षा कैंटीन में बैठी रोहन का इंतजार कर रही थी कि अविनाश के साथ ...
चलो दूर कहीं... 14रवि के बेहोश होते ही प्रतीक्षा को लगा जैसे पावर कट हो गया हो.. उसका संपर्क ...
चलो दूर कहीं... 13अनाह के आंखों के संपर्क में जैसे ही रवि की आंखें आई उसे लगा जैसे करंट ...
चलो दूर कहीं... 12पश्चिम क्षितिज पर सुरज, किसी नई नवेली दुल्हन के घूंघट की भांति सरक रहा था.. जिससे ...