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कोख से अंत तक - 1

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एक माँ आज रो रही है।उसका दम घुट रहा है, वह धीरे-धीरे मर रही है।क्या कोई उसकी पीड़ा को ...

सीमाओं से परे - 4

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पता ही नहीं चला कि दो महीने का समय कैसे निकल गया। शादी की तैयारियों और खरीदारी में दिन ...

पर्दे के पीछे - 6

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दादा जी ने डॉक्टर की बात सुनकर आश्चर्य से पूछा,“ऐसा क्या हो गया डॉक्टर साहब, जो आपको इतनी रात ...

खेतों में खड़े खंभे

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आज काफी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रही थी।ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए मन में कई ...

पर्दे के पीछे - 5

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ट्रेन धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर बढ़ती रही और कुछ ही घंटों बाद वह उस छोटे से स्टेशन पर ...

सीमाओं से परे - 3

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देखते ही देखते सगाई का दिन भी आ गया।घर में चारों तरफ खुशी का माहौल था।सब लोग तैयारियों में ...

पर्दे के पीछे - 4

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शाम को मिश्राजी घर आए।आकर उन्होंने रोज़ की तरह हाथ-पैर धोए और फिर खाने के लिए बैठ गए।आज का ...

पर्दे के पीछे - 3

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सब औरतों की हँसी-मज़ाक चल रही थी।किसी के नए सूट की बात…किसी के मायके जाने की तैयारी…किसी के भजन ...

पर्दे के पीछे - 2

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मिश्रा जी जैसे ही अंदर आए, उन्होंने देखा — मिश्राइन जी का चेहरा उतरा हुआ था।बच्चियाँ चुपचाप टीवी देख ...

सीमाओं से परे - 2

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सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी।राधा की नींद सबसे पहले खुली।उसने करवट लेकर सीमा ...