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अनकही देहलीज़

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अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल से नज़रें नहीं हटाईं। खिड़की ...

असली कातिल।

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बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन्नाटा और ...

परछाइयों का शहर

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"क्या तुम्हें सच में लगता है कि तुम यहाँ से वापस जा पाओगे?"अंधेरे कमरे में यह आवाज़ किसी सूखे ...

लिव इन का रिश्ता।

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"चाय में चीनी कम है, या शायद आज मेरा ही मूड ठीक नहीं," माधव ने खिड़की के बाहर उड़ते ...

बेटे की चाह

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ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर ...

बलि का बकरा

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गाँव की पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। सूरज ढलने को था, लेकिन हवा में एक अजीब सी तपन ...

जीरो बेरोजगारी

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शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी। निखिल ...

आजाद सवेरा

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कोहरे की चादर ने पूरी घाटी को ढका हुआ था। दूर कहीं से आती हुई झरनों की आवाज सन्नाटे ...

कोख का संघर्ष

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भाग 1: विश्वास की दरारसुहानी खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रही थी, लेकिन ...

प्यार, परांठे और पंगा

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शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कबीर खुद को एक सुलझा हुआ इंसान समझता था, लेकिन सच तो यह ...