मै लेखक हु।सन 1978 से लगातार मेरी रचनाये पत्र पत्रिकाओं मे प्रकाशित हो रहीहैं।अनेक सम्मान व विधा वाचस्पति की उपाधि मिल चुकी है।पहली रचना"दीवाना तेज"मे 1978 मे प्रकाशित।तब से निरन्तर लेखन 6 किताबे प्रकाशित.3 ebook हिंदी और एक इंग्लिश में एक अंग्रेजी पोएट्री बुक Dont touch me पेपरबैक और ईबुक प्रकाशित

।तब वहअभी दो बार टी वी पर रेड पिक्चर देखी।
कहानी पैसा और पॉवर की है।अपार सम्पति है जिसका अंदाजा उसे भी नही।राजनीति में दबदबा है।सरकार बना गिरा सकता है।खूब चंदा देता है।
उसके यहाँ incometex की रेड पड़ती है।पहले वह रौब झाड़ता है।फिर डराता है और काम नही चलता तब रिश्वत का लालच देता है।पर अधिकारी टस से मस नही होता।तब वह दबाव डलवाता है।छोटे मोटे दबाव काम नही आते तब PM तक पहुंच जाता है।लेकिन दाल नही गलती तब वह अपने गुंडों से हमला करवाता है।पर कुछ काम नही आता और उसे सजा हो ही जाती है।
खान का बेटा ड्रग्स में पकड़ा गया।दोषी है या नही इसका फैसला अदालत करेगी।लेकिन पहले ही मीडिया ट्रायल शुरू हो गया।मंत्री तक उसके बचाव में उतर आए।कई स्टार कहने लगे उसे मुसलमान होने की सजा मिली है।पैसे के बल पर बड़े बड़े वकील किये गए जमानत के लिए लेकिन तारीख डर तारीख
और पैसा भी काम नही आ रहा।
पैसे से सब कुछ नही खरीदा जा सकता।

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कभी सोचता हूँ
अगर सेलेबिटरी न हो तो न्यूज़ चैनलों का क्या हो?सेलिबेटरी1 प्रतिशत से कम और आमजन 99 प्रतिशत से ज्यादा है।इन 99 प्रतिशत में बड़ी आबादी उनकी है जिनके पास मकान नही है या दोनों टाइम खाने को नही है।वंचित है ये लोग
मीडिया को सिर्फ सेलिबेटरी की चिंता है।वह कब सोते है,कब उठते हैं, कब खाते है,क्या खाते है,उनके जीने मरने को महिमा मंडित करते रहते है
आम आदमी जी वंचित है जीवन की मूलभूत जरूरतों से उसके लिए मीडिया के पास टाइम नही है

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विचार करे
कहते है समाज और सिस्टम की ज्यादतियां भी किसी किसी आदमी को अपराध के रास्ते पर ले जाती है
आदमी अपराधी कैसे भी बने
पर हर अपराधी की माँ और बहन भी होती है
जब किसी औरत का भाई या बेटा अपराध के रास्ते ऊंचाई पर चढ़ता है तो वे खुश होती है
क्यो

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