સંગાથ....દિલ થી દિલ સુધી

वैसे तो कहीं मैसेज पढ़े हैं बिना देखे इनबॉक्स में,

वक्त तो हमारे पास भी नहीं है तुम्हारी तरह,

पर कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें हम इंतजार करवाना नहीं चाहते....

wazir

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खेर अब क्या गिला और क्या शिकवा इस जिंदगी से,
एक वक्त था जब हमें लगता था कि तुम हो हमारे साथ,
पर देखो हम तो आज भी अकेले ही है....
vi wazir

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लफ़्ज़ आजाद थें,
जिंदगी भी फिजाएं लहरा रही थी,
तो हमने भी थोड़ा खुद को आजमा लिया....
vi wazir

आजाद होने का वक्त आ गया अब,
बस कुछ लम्हे बिताने बाकी रह गए अब....
vi wazir

यूं तो थोड़ा काफिर दिमाग हमारा भी था,
पर हमने कभी आपके खिलाफ गुस्ताखिया नहीं की....
vi wazir

जालिम सी दुनिया ने मुसाफिर बना दिया हमें,
ठहरने को कहकर रास्ते की लंबाई जताने लगे,
और हम चल दिए....
vi wazir

कुछ जाम आधे थे,
कुछ लफ्ज़ ठहरे हुए थे,
ए जिंदगी की तन्हाई में हम भी कहीं बिखरे हुए थे....
vi wazir