धीरे धीरे आके
हवा गुनगुनाके, हर खबर दे तुम्हारी
कैसा येह नशा है, नज़र में घुला है
हर घड़ी है खुवांरी
नशे में कदम मेरे उधर कभी इधर
घूम सुम नज़र, जाए किधर
खो गए तुझमे हम इस कदर
यूं शबनमी,
पहेले नहीं थी चांदनी

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जाम हाथों से छलकने ना दूँगा
राज़ की बातें ना किसी से कहूँगा
अब के तुम आये तो वादा है मेरा
आज मैं तुझको ना जाने ना दूँगा

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धानि सी धानि सी
शरबती पानी सी
धीरे-धीरे से तेरी चाहत चढ़ती है
थोड़ी नादानी सी
थोड़ी शैतानी सी
धीमे-धीमे से तेरी आदत बढती है
तू है तो मेरे रूबरू पर क्या करूँ
यकीं ही नहीं आता
शाम से सुबह करूँ
देखा करूँ रहा भी
नहीं जाता
अफ़ीमी है तेरा मेरा प्यार

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यह मेरा दिल गया
बस दिल्लगी में
भूल के दो जहां
डुबा तेरी आशिकी में
सोचता हुं सनम
इकरार कैसे करूं में
प्यार के दर्द का
इजहार कैसे करूं में

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