જ્યારે તમને કોઈ ગમે ને. ત્યારે તમને બધું જ ગમવા લાગે...#upen#**

*नाराज न होना कभी*
*यह सोचकर कि…*
*काम मेरा*
*और*
*नाम किसी का*
*हो रहा है*

*घी और रुई सदियों से*
*जलते चले आ रहे हैं…*
*और*
*लोग कहते हैं…*
*दिया जल रहा है।*

🌞 *सुप्रभात* 🌞
जय श्री राधामाधव,,,,,,

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*अर्जून ने कृष्ण से पुछा..*
*"ज़हर क्या है"..?*
*कृष्ण ने बहुत सुन्दर जबाब दिया...*
*"हर वो चीज़ जो ज़िन्दगी में*
*॥आवश्यकता से अधिक होती है*
👉 *वही ज़हर है*
फ़िर चाहे वो *ताक़त* हो, *धन* हो, *भूख* हो, *लालच* हो, *अभिमान* हो, *आलस* हो, *मह त्वकाँक्षा* हो, *प्रेम* ॥हो या *घृणा*..
*"जहर ही है"*
शुभ सवार जय श्री राधामाधव,,,

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*जिंदंगी*
*कुछ गुज़री,*
*कुछ गुज़ार दी,*
*कुछ निखरी,*
*कुछ निखार दी,*
*कुछ बिगड़ी,*
*कुछ बिगाड़ दी,*
*कुछ अपनी रही,*
*कुछ अपनों पर वार दी,*
*कुछ इश्क में डूबी,*
*कुछ इश्क ने तार दी,*
*कुछ दोस्त साथ रहे,*
*कुछ कसर दुश्मनों ने उतार दी,*
*बस...*
*ज़िन्दगी जैसी मिली मुझे,*
*ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..*
शुभ सवार जय श्री राधामाधव,,,,

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*न "माँग" कुछ "जमाने" से*
*" ये" देकर "फिर" "सुनाते" हैं*

*"किया" "एहसान" "जो" एक "बार"*
*वो "लाख" बार "जताते" "हैं"*

*"है" "जिनके" पास "कुछ" "दौलत"*
*" समझते" हैं "खुदा" हैं "हम"*

*"तू "माँग" "अपने" प्रभु " से*
*"जहाँ" माँगने "वो" भी "जाते" है..*
शुभ सवार जय श्री राधामाधव,,,,,

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*मजबूत होने मे मज़ा ही तब है जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो...!*

*काबिलियत इतनी बढाओ कि आपको हराने के लिये कोशिशें नही साजिशें करनी पड़ें...!!*

*🌹सुप्रभातम् जय श्री राधामाधव आपका दीन मंगलमय रहे।🌹

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*परीक्षा संसार की, प्रतीक्षा परमात्मा की और समीक्षा अपनी करनी चाहिए।*
*लेकिन हम*
*परीक्षा परमात्मा की, प्रतीक्षा सुख की और समीक्षा दूसरों की करते हैं।*

शुभ सवार जय श्री राधामाधव,,,आपका दीन मंगलमय रहे।,,,,,

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*वृद्ध अतीत में जीता है*
*इसलिये निराश रहता है*
*युवा भविष्य में जीता है*
*इसलिये परेशान रहता है*
*बच्चा वर्तमान में जीता है*
*इसलिये प्रसन्न रहता है..*
*इसलिये सदैव वर्तमान मे*
*जियें और प्रसन्न रहे!*

🙏 *सुप्रभात्*🙏
🌹जय श्री राधामाधव🌹

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