भावों की ये, अभिव्यक्ति शब्दों के आधार है मेरी कलम ही, मेरे अस्तित्व की पहचान है.

मनुष्य के दो महान शत्रु होते हैं...
पहला.. अहम्
और
दूसरा.... वहम्
अहम् स्तर घटाता है..
और
वहम् रिश्ते घटाता है..

Uma vaishnav

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प्रेम एक आस्था हैं ,
प्रेम एक विश्वास है,
प्रेम से ही तो दिल की
ये दुनिया आबाद है

उमा वैष्णव

ऐ चाँद..,
चल अब सोजा...,
उसके *नूर* को देख कर........ कहीं तेरी चमक...
कम न हो जाए।।।

Uma vaishnav

प्रेम बिना.... ❤️❤️

प्रेम की कोई एक भाषा,

कोई एक जुबान नहीं होती,

प्रेम बिना जिंदगी में,

कभी मुस्कान नहीं होती,

प्रेम बिना दिल में धड़कन,

मन में चाह नहीं होती,

प्रेम बिना जिंदगी इतनी,

कभी खुशनुमा नहीं होती,

प्रेम बिना कृष्ण की मूली में,

वो मीठी तान नहीं होती,

प्रेम बिना मीरा के घुँघरू में,

वो मधुर झंकार नहीं होती,

प्रेम है अनोखा बंधन,

जिसके बिना ये कायनात नहीं होती।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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माता शीतल छाँव हैं, पिता सुनहरी धूप,
इन दोनो के प्रेम से, निखरे बालक रूप।

Uma vaishnav

पिंजरा
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मेरा मन,
पिंजरे का पंछी,
भावों की उड़ान भरे,,
कभी गगन में उड़ाना चाहे,,
कभी समुन्द्र के पार यह चले,
मेरा मन,
पिंजरे का पंछी,
भावों की उड़ान भरे,
कभी रेत के महल बनाये,
कभी पेड़ पर बसेरा यह करें,
मेरा मन,
पिंजरे का पंछी,
भावों की उड़ान भरे,
कभी कागज की नाव बनाये,
कभी लहरों के यह साथ बहे।।।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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सुप्रभात।
चाहे कैसी भी स्थिति को सच के साथ रहिये।
#सचकेसाथ #yqdidi #YourQuoteAndMine
Collaborating with YourQuote Didi

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मुखौटा
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मुखौटे की हो हैं,
अपनी ही कहानी,
छुपाके ये रखता है,
कितनों की निशानी,
जीवन में इसके
कोइ सार नहीं है,
इसलिए तो इसका कोई,
निश्चित आकार नहीं हैं।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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बेटी
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बेटी चंचल चांदनी ,

बेटी सुनहरी धूप,

बेटी जिस घर जन्में, वो घर स्वर्ग स्वरूप,

बेटी घर की रोशनी,

बेटी दिव्य स्वरूप,

बेटी में दिखता मुझको, जगतम्बा का रूप,

बेटी घर की रोनक हैं,

बेटी पावन रूप,

बेटी माँ के नाम को, करती हैं सम्पूर्ण,

बेटी माँ की परछाई,

बेटी पिता का मान,

बेटी होती माँ की ममता का सम्मान,

बेटी सुख-दुख की साथी,

बेटी दिल का सुकुन,

बेटी ही पहुचाती हैं, दिल को राहत और सुकून

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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यादें /तन्हाई

फिर याद आती है,तेरी वो बातें,
करते थे जब हम, तन्हाई में बातें,
जाने अब वो लम्हें कहाँ खो गये,
हम भीड़ में अब अकेले हो गये,
काश कोई उन्हे ये जा कर बताये
दिल के मेरे दर्द को गा कर सुनाये
तन्हाई में अब न कटेगा ये सफ़र,
आजाओ बन कर तुम हम सफर

Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित

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