" बहुत दिनों से भूल गई थी... चल ए जिन्दगी अब तुजे जिया जाए "

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मुकद्दर की लिखावट का
एक ऐसा भी कायदा हो,,

देर से किस्मत खुलने वालो का
दुगुना फायदा हो...

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सब कुछ चाहने से
हासिल हो जाए,
ये मुमकीन नही,
जनाब,ये जिंदगी है
पिता का घर नही...

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फीकी सी लगती है,
अटक जाती है हलक में,,

बातें जिनमें तुम्हारे नाम का,
ज़ायका नही होता...

जिंदगी तेरे ख्वाबो में गुजरे
ये भी कहाँ मुमकीन हे अब,

कमबख्त तेरे ख्याल से,
नींद जो नही आती अब....

♡ तमन्ना ♡

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अल्फाज़ो में क्या बयाँ करें,
अपनी मोहब्बत के अफसाने,,

हम में तो तुम ही हो,
तुम्हारे दिल की तु जाने...

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अब गिला क्या करना,
उनकी बेरूखी का यारो,

दिल ही तो था,,
भर गया होगा... !!

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रह गई उम्मीद तो,
बर्बाद हो जाऊंगी मैं,,

जाइए तो फिर मुझे,
सचमुच भुलाते जाइए...

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पागलपन की हद से ना गुजरे
तो वो इश्क कैसा,,

होंश मैं तो,
रिश्ते निभाये जाते हैं...

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एक धोखे से हिल जाती है,
जमीन ऐतबार की,,

जिंदगी तबाह करने के लिए,
भूकंप आए ये जरुरी नही...

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इश्क होना भी लाजमी है,
शायरी के लिए,

वरना,,

कलम लिखती तो,
दफ्तर का बाबू भी
गालिब होता...