" बहुत दिनों से भूल गई थी... चल ए जिन्दगी अब तुजे जिया जाए "

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तुजको बेहतर बनाने की कोशिश मे,
तुझे ही नही वक्त दे पा रहे हे हम,,

माफ करना ए जिंदगी,
तुझे ही नही जी पा रहे है हम...

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कहाँ छुपे हो सीने में तुम,
साँसें भारी रेहती है,

हो नींद में,या हो सपनों मे,
क्यूँ पलके भारी रेहती है...

@गुलजार

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सारे रंग तुम अपने रखना,
आँख का रंग तो मेरा हो,,

हो थोड़ी थोड़ी शाम की रंगत,
हल्का हल्का सवेरा हो...

@गुलजार

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मुख्तसर सा गुरुर भी
जरुरी हे जीने के लिए,
ज्यादा झुक के मिलो
तो, दुनिया पीठ को
पायदान बना लेती है...

मेरी कोई खता तो साबित कर,
जो बुरा हु तो बुरा साबित कर,,

तुम्हे चाहा हे कितना तु क्या जाने,,

चल मे बेवफा सही,
तु अपनी वफा साबित कर...

@गुलजार

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खुद मे झाकने के लिए
जिगर चाहिए,

दूसरों की शिनाख्त मे तो
हर शख्स माहिर हैं...

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भगवान मेरे हाथों में तु
तकदीर लिखे या ना लिखे

है दिल की दुआ धड़कन पे मेरी
बस भारतमाँ का नाम रहे

ए देश मेरे मे तुझ पे कभी
पड़ने ना दु गैरो की नज़र

तुझे धूप गमो की छू ना ले
मैं खड़ा हु ना जो बन के शझर..


स्वतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ...

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थोड़ा सा रफू करके देखिए ना,
फिर से नई सी लगेगी,

जिंदगी ही तो है.....

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जिंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,,

काफिला साथ, और सफर तन्हा...

यादों की दरख्तो पर हमने
कुछ फूल उगाए रखे है ।।

थोड़ा प्यार,थोड़ा अपनापन,
रोज इसमे सिंचा करते है ।।

खूश्बु उसकी साँसो मे भरकर,
खुद को तरोताझा रखते है ।।

कभी रंगो में, कभी पंखूड़ी मे,
तुम्हे मेहसुस किया करते है ।।

कभी मुरझाए ना ये फूल,
तुम्हारी भी ये जिम्मेदारी है ।।

यादो की दरख्तो पर हमने
कुछ फूल उगाए रखे हैं ।।


~~तमन्ना~~

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