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Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
3 सप्ताह पहले

मन की नदी में
तर्पण किया है पापा भावनाओं से,
भीगा सा मन लिए ...
इस पितृपक्ष
फिर बैठी हूँ आकर, भोर से ही
छत पर, जहाँ कौए के
कांव - कांव करते शब्द
और सूरज की बढ़ती लालिमा
के मध्य, निर्मल स्नेह भर अंजुरी में
कर रही हूँ अर्पित,
नेह की कुछ बूंदें गंगाजल के संग
आशीष की अभिलाषा लिए!!!
…..
© सीमा 'सदा'
#पितृपक्ष_पापा

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शिक्षा से नाता
गुरू भाग्य विधाता
माँ देती सीख।

- सीमा 'सदा'
©

जब भी ये वक़्त
इम्तिहान लेता है न
तो पहरे पे
मुश्किलों को लगा देता है !!
©

Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
1 महीना पहले

ज़िंदगी को सवांरती रही,
#बेख़बर हर अंजाम से
रब जो करेगा,
वो अच्छा ही करेगा!!

©- सदा

Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले
Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले

जब भी ये वक़्त
इम्तिहान लेता है न,
तो पहरे पे
#मुश्किलों को
लगा देता है !!
...
©सीमा 'सदा'

Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले

कर कमल
पग धरो दिव्यता
आलोकित हुई धरा,
कण-कण है शोभित
आगमन से आपके
मन मुग्ध हुआ
जो अधीर था !
….
कामना शुभता की
ह्रदय में संजोये
अभिनन्दन है
आदिशक्ति का
कर कमल 
पग धरो दिव्यता !!
© सीमा 'सदा'

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Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले

हँसती थी जब भी जिंदगी
#खुशियों  के मेले में
फ़िक्र, परेशानी, और
उदासियों के
गुब्बारे उड़ा कर
तालियाँ बजाकर
कोई मन बच्चा हो जाना चाहता था !
....

- सीमा 'सदा'

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Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी हाइकू
2 महीना पहले

खेलता मन,
#संचित यादों संग
प्रफुल्लित हो !
....
सीमा 'सदा'

Seema singhal sada कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 महीना पहले

शब्दों को साधना
जानती है वो,
किस शब्द को
कब कहाँ जगह देनी है
बख़ूबी पता भी है..
कठोर से कठोर
ज़िद्दी से ज़िद्दी शब्द,
सब उसके एक इशारे पे
नतमस्तक हो जाते हैं,
सफ़ेद कागज़ पर
काला लिबास
सारे के सारे शांत !

प्रत्येक पंक्ति में ..
अपने अर्थों से परिचित होकर भी,
सारे शब्द,साथ-साथ
सामंजस्य बिठा लेते हैं
कमज़ोर हैं कुछ तो कुशल भी
बहुत हैं, कुछ दिव्यांग भी
तो कुछ अज्ञानी भी
विस्मृत मत होना ..
इसी कतार में
दम्भी और त्यागी,
रागी और बैरागी सभी हैं..
बिना किसी द्वेष भाव के,
फ़िर फ़िक्र कैसी ?

साधना कला है
और प्रेम उन सभी कलाओं को
खुद में आत्मसात करने का
सबसे बड़ा गुण है
जो सारे अवगुणों पर अंकुश
लगाने में सिध्दहस्त है !!!!
….

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