Hey, I am on Matrubharti!

बैर बीच हमारे तमाम हो गए |
सबके दिलों तक नीलाम हो गए ||
नसीब ने कुछ ऐसा मौड लिया |
हम भी अपने गुलाम हो गए ||

करवा चौथ पर जो तुम्हारा था
ईद पर आज हमारा हो गया
चांद को खबर तक नहीं
जमीन पर बंटवारा हो गया

पत्थर के शहर में कच्चे मकान कौन रखता है..
आजकल हवा के लिए रोशनदान कौन रखता है ..!
अपने घर की कलह से फुरसत मिले तो सूने..
आज कल पराई दीवाल पर कौन कौन रहता है ..!
खुद कि पंख लगाकर ऊडा देते है चिडिया को ..
आज कल परिंदो मैं जान कौन रखता ह..!
हर चीज मुहिया हैं मेरे शहर किशतो पर..
आज कल हसरतो पर लगाम कौन रखता है ..!
फिजूल बतो पर सब करते है वह वाह ...
अच्छी बातो को अब जुबान कौन रखता है ..!

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ये खुदा तु देजा हमे कोई ऐसी कोई
वजह कि गले से लगा ले हमे
वो कह के गये के बात हम करँगे
मगर जरा सा लिहाज मे रहकर

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बस यही सोच कर कठीनाई से लडती आई हुं कि़....
धुप कितनी भी तेज हो, समंदर सुखा नहीं करते है़....!!!