Hey, I am on Matrubharti!

खुद से किया आज एक वादा है , अपने कल को भुलाना है । उस गली , उस दरवाजे पर जा कर फिर से वापस यही आ जाना है । जो भी हुआ , जैसे भी हुआ खुद को मजबूत बनाना है । अपने आज को बेहतर बनाना है , बीते हुए लम्हों को भूल कर आज यही मुस्कुराना है ।

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ज़रा देर से ही सही , पर सफलता का स्वाद चखा मैंने । अपनो का साथ अपनो का विश्वास था कि हमसे सब हो पाएगा । कभी - कभी कदम लड़खड़ाए भी , चोट भी लगी पर नजर सिर्फ मंज़िल पर थी। आज वो सब मिला जिसके हकदार थे हम ।

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तू जो करे खुद पर ऐतबार , तो यह दुनिया तुझ तक आएगी। तेरे पीछे तेरे मशहूर होने के किस्से भी गाएगी ।

जो चला गया था इस शहर से मै वापस , अब कुछ बन कर आऊगा ।तेरे लिए ना सही पर खुद की निगाहों मैं उठ का आऊगा । की तू भी क्या याद करे किसको ठुकराया था , अपने पैरो के नीचे किसी के सपनों को दबाया था ।

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एक सपना देखा था , इस भीड़ मैं अपना भी नाम देखा था । आज तक जो अकेला था , आज अपने पीछे लोगो की फोज को देखा है ।

कुछ गुज़ारा हो रहा है , बस अपना काम हो रहा है । कही किसी भीड़ मैं अपना भी थोड़ा सा नाम हो रहा है ।

ज़िन्दगी की पशो पैश मैं इतना उलझ गए हम , की साहिल ने भी दरिया से टकरा के हमसे हमारे होने का वजूद पूछ लिया ।

हम अपने ही दुःख मैं मशगूल थे , अपनी ही ज़िन्दगी मैं चूर - चूर थे कि कभी किसी और का दुख तकलीफ देखने को ही नहीं मिली । आज पता चला कि हम एयवाई ही ईश्वर को कोस रहे थे , जो उसने कभी किया ही नहीं उसका दोष उसके सर माथे थोप रहे थे ।

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ज़िन्दगी की हर जंग छोटी लगती है , जब आप किसी एसिड अटैक को देखते हो । दर्द उन्हें भी होता है तकलीफ उन्हें भी होती है । पर वो अपनी मुसीबतों के आगे कभी भी घुटने नहीं टेकती , गुस्सा आता है उस इंसान को देकर जो एसिड फेकने जैसी बुजदिल हरकत करता है । क्या उसके घर मैं कोई मां बहन नहीं , या उसके सीने मैं दिल नहीं । किस मिट्टी का बना है वो जो अपनी मां की गर्दन शर्म से झुका रहा ।

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शरारत ज़िन्दगी ने यू इस कदर की , की जो भी था वो हाथ से फिसल गया । किसी को दोष हम क्यो दे , जब हमने ही यह रास्ता चुना । लोग तो आएगे और चले जाएंगे बस साथ तो तुम्हारा और हमारा ही रहेगा । हम क्या चाहते है अपनी ज़िन्दगी यह मायने रखता है ना कि कोई और क्या । खुद के लिए समय निकालें , खुद को यह बार बार याद दिलाए कि अभी तो बस शुरवात है , अभी तो पूरा आसमा फतह करना है ।

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