Hey, I am on Matrubharti!

जो भी हो अपनी मंज़िल को पार करना है आज कुछ नया कर के दिखाना है आज । दुनिया मै जीतते तो सब है पर दुनिया को फतह सिर्फ कुछ लोग ही करते है । अगर कल मर गए तो किसको याद आओगे , इसलिए ऐसा कुछ कर जाओ की मर कर भी लोगो के दिल में अपना नाम कर जाओ ।

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कोरे कागज़ पर कुछ लिख रही हूं आज मैं , शायद अपनी ही कहानी लिख रही हूं आज मैं । चंद शब्दो की मेरी यह कहानी मेरी वयाख्या कर रही है आज । एक नए मंज़िल की तरफ मेरा पहला कदम है आज , एक नए सफर की तलाश में हूं आज ।

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बहुत समय लगा यह एहम फैसला लेने में , किसी को अपने दिल से दूर करने में । थोड़ा मुश्किल था पर नामुमकिन नहीं , लोगो ने बहुत कहा मुझे अपनी अपनी तरह से समझाया भी मुझे की एक ज़िन्दा लाश लिए चल रहे हो तुम । पर दिल भी बड़ा ज़िद्दी था थोड़ा बेफिक्रा था , किसी की कहा सुनता था । जब तक खुद से खुद की जंग नहीं हुई अपनी ज़िन्दगी की कीमत कहां पता चली । पर अब मैं खुश हूं अपने आपको एक आइना दिखाना बहुत ज़रूरी था , खुद को खुद से मिलाना जरूरी था ।

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हमसे ना हो पाएगा कहने वाले देख लो आज हमसे सब हो पाएगा ।पहले हमें भी लगता था कि हम थोड़े से कमजोर है तुम्हारे साथ के बगैर कुछ ना हो पाएगा हमसे । पर वक़्त के साथ - साथ हमने जीना सीख लिया , जो भी कमजोरी थी हमारी उनको अपनी तागत बनना सीख लिया । अपने से एक जंग थी वो जंग जितना सीख लिया ।

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कुछ चीजो का निकल जाना ही सही होता , नहीं तो ज़िन्दगी भर एक टीस सी मारती रहती है । कुछ लोग आते ही है निकलने के लिए , ऐसे लोगो का ना रहना सही और जाना तो और भी अच्छा होता है । जो सच्चा होता है वहीं अपना होता है , दो पल की मुलाकात में कोई अपना नहीं होता । जो अपना होता है वो कभी साथ नहीं छोड़ता इसलिए ज़िन्दगी के मज़े लो जो बीत गया उसको छोड़ कर जो आने वाला कल है उसके बारे में सोचो ।

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मेरे दिल का पंछी अब उड़ने लगा है , जो इतने सालो से बंद बिंजरे में दबा था वो अब मचलने लगा है । ना जाने कैसी यह हलचल है जो बंद थी किताब वो धीरे धीरे खुलने लगी है । जो अभी तक नहीं किया वो करने का मन करता है ना जाने क्यों खुद को अभी तक रोके रखा था । बंद किसी ताले में खुद को रोके रखा था , पर अब नहीं ज़िन्दगी इतनी खूसूरत है उसको दम भर के जी लेने दो कल पता नहीं हो की ना हो।

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कब क्या हो जाए पता नहीं , कब कौन रूठ जाए पता नहीं । ज़िन्दगी कितनी छोटी है , यह बाद में पता चलता है । जब अपना कोई आपसे रूठ जाए और लाख जतन के बाद भी कोई ना माने । ज़िन्दगी एक रेत की तरह है हाथो से कब छूट जाए कुछ नहीं कह सकते इसलिए वक्त रहते ही सब सही कर लो , अपना अहंकार छोड़ कर अपनो को गले लगा लो ।

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अगर ऐसा होता , अगर वैसा होता हम यह करते हम वो करते बस इन सब फेर बदल के बीच में ही हमारी ज़िन्दगी उलझी रहती है । करना तो बहुत कुछ होता है कभी हालात साथ नहीं देते तो कभी किस्मत । पर क्या हमको इन सब का फर्क पड़ता है क्योंकि हम ही जो अपना भाग्य लिखते है और हम ही है जो उसको बिगाड़ते है । तो फिर ईश्वर को दोष क्यो ?। अभी भी देर नहीं हुई अपनी सोई हुई किस्मत को जगाने का और फिर से कुछ कर गुजरने का ।

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हा उसको प्यार था मुझसे ऐसा सोचा करते थे हम , काभी गलतफहमियों में जी रहे थे हम । एक बेहतर कल की तलाश में अपना आज खराब किए जा रहे थे हम । कोई और था जो हमसे भड़ कर हमको चाहता था कहीं , किसी नादान के चक्कर में कभी देख ही नहीं पाए उसकी एहमियत को । पर आज भी उसको इंतज़ार है हमारा पर आज भी हम अपने बुने हुए जाल में फंसे हुए है हम ।

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हम आज़ाद होकर भी आज़ाद नहीं है , अपने ही बनाए हुए चक्रव्यूह में फंसे हुए है । क्या सही है क्या गलत कुछ समझ ही नहीं आता , बस एक भैड चाल में चल रहे है ना शुरु का पता ना ही अंत का । ऐसा नहीं है कि हम उस मैं से निकलना नहीं चाहते पर हम दुनिया के साथ चल रहे है । कभी कुछ अलग करने की सोची ही नहीं , भीड़ मैं अपना नाम करने की सोची नहीं । पर अब वक्त आ गया है , अपनी क्षमताओं को परखने का उनको इस्तेमाल करने का । जो अभी तक नहीं किया कुछ ऐसा कर गुजरने का ।

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