बहुत सारी कहानियों कविताओं के बीच आया हुँ।। लेखकों को जानकर उनसे बात करके उनकी सृजन पृक्रिया को जानना आनंद देता है।।

Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
21 घंटा पहले
Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 दिन पहले

सुनो
चाय का कप जो हर सुबह तुम्हे मिलता है , मुझे वो बना लो
या चाबी का गुच्छा
जो तुम्हारे पल्लू से लटकता है,
वो दामान जो तुम्हारे दिल के करीब रहता है ,
या दीवार पे टंगा शीशा
जो
मैं बनके
हर दम तुमको देखता है,
वो तकिया जिसपे तुम्हारा सर टिकता है
या वो टेडी बीयर
जो तुम्हारे गले लगता है ,
वो तौलिया
जो तुम्हारे बाल सुखाता है
या छत का पंखा
जो तुम्हे मीठी नींद सुलाता है
या चाहो तो
मुस्कुराहट बनाके
अपने होठों पे सजा लो,
या बना लो मुझे कंगन जो तुम्हारे हाथों में खनकता है,
नहीं तो काजल
जो तुम्हारी आँख में सजता है
या सब छोडो
बस बना लो
मुझे अपना दिल
जो तुम्हारे सीने में
धड़कता है!!

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Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
3 दिन पहले

माना कि नहीं घुली है जुबां में चाशनी- ए- नफासत मेरी
तो क्या अलफ़ाज़ के सहारे जीते रहने का हक़ भी छीन लोगे मुझसे

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Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी चुटकुले
5 दिन पहले

mausam aate jate rehte

Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
5 दिन पहले
Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
6 दिन पहले

तुम्हे होंगी पसंद रंगिनियाँ नयी दुनिया की
मैं तो गुज़रे वक़्त की राख पे ज़िंदा हूँ

Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
1 सप्ताह पहले
Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
1 सप्ताह पहले

😔😔

Shirish Sharma बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 सप्ताह पहले

दर्द में
दुआ
बन
हवा
बन
दवा
बन
ना
बस
" खाली- जुबां "
बन !!

पहचान

ये ना समझना कि अनजान हूँ तुम्हारे घर से

तुम्हारे घर का हर शीशा अल्हड़पन है मेरा जो तुम्हे सारा दिन छेड़ता है

फर्श जिसपे तुम चलती हो ये मेरे कान हैं जो तुम्हारे क़दमों की आहट पहचानते हैं

चूड़ियां जो तुम्हारे हाथों में बजती हैं
ये मेरे लिए ही तो खनकती हैं

लाली जो तुम्हारे होठों पे रचती है
ये मेरे लिए ही तो सजती है
तुम्हारे माथे पे लगी बिंदी
मेरा काम ही तो करती है

बुरी नज़रों को तुमसे दूर रखती है
तुम्हारी मुसकान राज़दार है मेरी
हर पल तुम्हारे मन की चुगली मुझसे करती है
तुम्हारे अलग - अलग पेन्डेन्ट जो तुम्हारे सीने से लटकते हैं

ये
छोटे - छोटे दिल हैं मेरे जो तुम्हारे दिल के साथ धड़कने को आपस में लड़ते हैं
ये न समझना कि मैं अनजान हूँ तुम्हारे घर से
सारे बल्ब.... ये तुम्हारा चेहरा रोशन करने के लिए कहे पे ही तो जलते हैं

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