One can experiences direct experience like suspense, thriller, action, romance, murder mystery in short story, long story and red it in my written book most of the stories, novels, social, spiritual, inspirational, creative, imaginative, Psychological, etihasic, technological, love emotional, Buddha, I have written books on all these topics and write Poetry, well thought out and creative quotes.. There are occupations and passions that flow in my blood like a veil Always... by--- Shekhar Kharadi

shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
6 घंटा पहले

#अस्पष्टता

प्रिये तेरी उन उपस्थिति में
मन में कैसी उथल-पुथल
श्वोसों में कैसी बोखलाहट ,
आंखों में कैसी गरमाहट
पलकों में कैसी फड़फड़ाहट ,
मन में कैसी तिलमिलाहट
प्रेमके अतिरेक बढ़कर ,
हृदय की ऐ कैसी व्यवस्था ?
क्या.. तुम्हें क्षणिक पता हैं ?
अस्पष्ट व्यवहार छोडकर
स्पष्ट व्यवधान जानकर ,
उलझा रखा भावनात्मक व्यवसाय
मस्तिष्क के असंख्य छिद्रों में जाकर ,
छिन्न भिन्न कर ड़ाला सपनों का शहर
अब क्षण-क्षण जीनें में क्या रखा हैं ?
जब मरकर भी यहाँ वहाँ भटकता रहूँगा ??

- © शेखर खराड़ी (२७/९/२०२०)

और पढ़े
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
10 घंटा पहले

साल २०२० में विश्व पर्यटन दिवस की थीम है -

" पर्यटन और ग्रामीण विकास " ( Tourism and Rural development )

shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी धार्मिक
1 दिन पहले

नमो बुद्धाय..💐🙏 आपका दिन अति सुंदर हो...

हे..दाता
हे.. करुणानिधि
मुझे सुकून भी मिलता हैं
राहत भी मिलता हैं
तेरे अनन्य सान्निध्य में
शीश झुकाकर...!!

और पढ़े
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
2 दिन पहले
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
3 दिन पहले
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी ब्लॉग
3 दिन पहले
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
5 दिन पहले
shekhar kharadi Idariya verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
6 दिन पहले

#विधवा

विधवा की ऐ कैसी विवशता, कैसी विडंबना ?
सदियों की प्रथाके नाम पर , परंपरा के नाम पर
स्त्री का शारीरिक, मानसिक शोषण होता रहा ।

जबरन श्वेत वस्त्र पहनाकर ,
केशों का गजरा उधेड़ दिया
माथें का सिंदुर मिटा दिया
काया का शृंगार हटा दिया
रूप का शीशा तोड़ दिया
पति की यादें जला दि ,
समाजनें अपशुकन मान लिया
लोगोंने सरेआम ठुकरा दिया
स्वजनों ने खुल्ला धुत्कार दिया
असहनीय,अकल्पनीय शब्दों से
अविश्वसनीय निर्दयी बर्ताव से
कलंके के छीटें छिड़ककर ,
धृणा का हलाहल पीलाकर
डाकन-चुड़ैल का नाम देकर
संबंधों में लकीरें खींचकर ,
कठोर नियमों में जकड़कर
खुशियों पर ग्रहण लगाकर
देखके प्राण सिसकते, बिलखते रहें ।


विधवा की ऐ कैसी विवशता, कैसी विडंबना ??
सदियों के प्रथाके नाम पर , परंपरा के नाम पर
स्त्री का शारिरिक, मानसिक शोषण होता रहा ।

जीवन नीरस-सूखा-बंजर बनाकर
दुःख के मातम में छोड़ कर ,
व्यथा के सागर में डूबो कर
कांटों के पथ पर चलाकर
नैनों के दृश्य में उलझाकर
भीतरी द्वंद्व में भटकाकर
इच्छा के मझधार में बहाकर
हृदय की भावना सूखाकर
रक्त का प्रवाह रोककर
नाड़ी को सिथिल बनाकर
कष्टों के भंवर में छोड़कर
सारे बंधनों को भूलाकर
अस्तव्यस्त त्रस्त करके ,
पग पग पर व्यवधान ड़ालकर
उसका सारा जीवन स्मशान बना दिया ।


विधवा की ऐ कैसी विवशता कैसी विडंबना ???
सदियों के प्रथाके नाम पर, परंपरा के नाम पर
स्त्री का शारिरिक, मानसिक शोषण होता रहा ।

( २०/९/२०२० )

--© शेखर खराड़ी

और पढ़े