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Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
3 महीना पहले

#Forget
तेरी यादों के साय में जी रहे हैं
तुझे भूलना मौत का आगाज होगा...

Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी मजेदार
3 महीना पहले

कॉरोना के लिए संदेश लिखा था लेकिन किसी ने बताया कि वह कमबख्त अनपढ़ है।इसलिए वीडियो के जरिए संदेश दे रही हूं..

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Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
4 महीना पहले

#उज्ज्वल
मन के संताप को हर ले
प्रभु ऐसा हमें प्रकाश दो।
उज्जवल हो जाए जग ये
ऐसा ज्ञान का प्रभात दो।

Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 महीना पहले

वह अंतिम मुस्कान भेद रही है मेरे हृदय को
मैं व्याकुल हूँ क्योंकि देख रही हूं निर्लज्ज आँखों में संतोष
मैं व्याकुल हूँ देखकर चुप्पी आनंद की उन लाल सोच के अधरों की,
मैं व्याकुल हूँ रक्तपान में शामिल जनों को देखकर
क्योंकि उनके हृदय में चल रहा है आनंद उत्सव
मैं व्याकुल हूँ उस बूढे निर्दोष चेहरे के अंतिम संदेश को देखकर,
निकल रही है आह् उन लोगों के लिए जो निकल पड़ते हैं अपने फायदे के लिए देश बाँटने जहरीले आँसू लिए..

अब सब मौन हैं क्योंकि वे आज संतुष्ट हैं इस रक्तपान से,
लबालब है उनके हाथों में रक्त से भरा कटोरा
अब वह नृत्य कर रहे हैं मानवता की मृतदेह पर,
कौन कहता है रक्तपिपासु जीवित नहीं हैं..।

दिव्या राकेश शर्मा

#पालघर_हत्याकांड

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Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कहानी
6 महीना पहले

"मैं कहती रही वह सुनता रहा..."
"फिर..?"
"फिर उसने सुनना छोड दिया.."
"तो...?"
"तो मैंने कहना।और इस तरह वह नालायक मेरे दिल से उतर गया..।"
और प्यार..?
"प्यार वहीं रहा... पहले से भी ज्यादा गहन..।"

दिव्या राकेश शर्मा

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Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
7 महीना पहले

सुरमई सी रात
और यह तन्हाई
आज फिर तेरी यादों के
हम करीब है....

Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
7 महीना पहले

रूह की तश्नगी तेरी मोहब्बत है
बह रही है जिस्म में लहू बनकर....

Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
7 महीना पहले

खत लिखा है इश्क़ को आज
अपने दिल की रोशनाई से
हर हर्फ में मेरी मोहब्बत है।
मिटा न देना तुम बेवाफाई से
कर रहे हैं इंतजार तेरा सनम
तन्हा है हम इस तन्हाई से....

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Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
7 महीना पहले

क्या जानो तुम मेरे जुनून ए वतन को
है नहीं मौजूँ कोई इसके खुलूस का।

दिव्या राकेश शर्मा

Divya Sharma verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
7 महीना पहले

तुम जान लो अहिल्या अब राम नहीं आयेंगे
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जीवित हैं आज भी बहुत सी अहिल्या
मुक्ति पाने को अपने प्रस्तर हो चुके जीवन से।
कर रही हैं प्रतीक्षा किसी के स्पर्श की
पर उन्हें राम नहीं मिलते।
वह जूझ रही हैं एक डर से
उस डर से जो निगल रहा है उनकी रोशनी
वह रोशनी जो बंद हो गई उनके ही हृदय में।
विचलित है पीडित है
खुद के ही भय से।
सामना करने की हिम्मत नहीं कर पाती
क्योंकि जानती हैं कि अब राम नहीं मिलते।
आते हैं कुछ लोग अतिथि बनकर
विचारों का जाल फैला कर दबोच लेते हैं मकडी बन
शोषण किया जा रहा है यह जानता ही नहीं मासूम मन।
वह बस यकीन करना चाहती है
उम्र पर अनुभव पर और स्वर पर
जानती नहीं इंद्र भी आया था छलिया बन
वह अहिल्या नहीं जानती ,
कि हर समय में उसका पुर्नजन्म होगा और
यूँही जीयेगी शिला बन,
पर इस बार राम नहीं आयेंगे
बल्कि हर बार आरोप उसके हृदय को
और विष से बींध जायेंगे
आवाज में उसके दर्द तो होगा जरूर
पर दुनिया के कान बहरे हो जायेंगे।
करती रहेगी प्रतीक्षा ऐसे ही लेकिन
नासमझ नहीं जानती कि अब राम नहीं आयेंगे
बचपन में उसे कहना नहीं आया
यह गलती थी उसकी।
शायद उसे मालूम ही नहीं कि
औरत का जन्म बचपन से ही उसे व्यस्क बना देता है
तभी तो कोई भी आकर उसके शरीर पर
अपने चिन्ह भेंट दे जाता है
झिंझोड़ जाता है उसके मस्तिष्क को
और छोड़ देता है एक अमिट छाप
जिससे रगड कर वह रोज साफ करती है लेकिन
हर सुबह वह निशान और गहरा दिखता है
ऐसा होता है क्योंकि उसे मिटाने अब राम नहीं आयेंगे
इसलिए अहिल्या तुम्हारे जन्म के साथ
यह किस्से यूँहीं दोहराएं जायेंगे।

दिव्या राकेश शर्मा।

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