Hयाद आते है वो दिन वो राते जब ख्वाबो में आप ही होते थे.. गुजर गए वो दिन वो राते अरसा गुजर गया पर वो नूर आज भी मौजूद है खुद की आखों में ....ey, I am reading on Matrubharti!

    कोई उपन्यास उपलब्ध नहीं है

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