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ज़िन्दगी ने यू मेरा मज़ाक बना डाला जब भी दिल से हस्ना चाहा ज़िन्दगी ने रुला डाला

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगी...भाग 6' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19869104/ab-nhi-sahugi-6

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हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगी...भाग 5' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868967/ab-nhi-sahugi-5

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हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगि...भाग 4' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868830/ab-nhi-sahugi-4

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगी...भाग 3' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868647/ab-nhi-sahugi-3

अगर मुम्किन होता किसी को अपनी सारी उमर लगाना तो में अपनी सारी उमर अपने बाबा के नाम लिखती

ज़िंदगी जब भी पड़ नी चाही तभी कुछ नया सीखा हमने
कभी गम को सेहना सीखा कभी जज्बातों में बेहना सीखा कभी खुद को बदलना सीखा जब सीखा हमने अच्छा सीखा

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मोहब्बत का ये अफसाना बना मुमताज़ का शाहजहां दीवाना बना क्या खूब की उसने मोहब्बत की नोमाईश गरीबों के लिए ताज प्यार का नजराना बना

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हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगी...भाग 2' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868526/ab-nhi-sahugi-2

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'अब नहीं सहुंगी...भाग 1' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868388/ab-nahi-sahungi-1