जब आप कोई अच्छा काम करें और लोग उसे नजर अंदाज करें तो कभी दुखी मत होना क्योंकि जब सूरज निकलता है तो बहुत से लोग सो रहे होतें हैं।

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

मोहब्बत हम नहीं करते, क्योंकि रो नहीं सकते।
भुल कर कई अपनों को, किसी के हो नहीं सकते।।
लोग जब बैहोश होते हैं, हमें तब भी होश रहता है।
ये गालियाँ इश्क की हैं, 'ठाकुर' यहाँ पर खो नहीं सकते।।

-Satish Thakur

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Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

तमाम दुनियाँ के हर रंजोगम, हर रोग हमें दे दो।
अब भी बचा है गर किसी के मन में कोई क्रोध हमें दे दो।।
हाँ दे दो सब कुछ हमें, हम विष पिएंगे, नाम 'ठाकुर' है।
तुम्हें दे दी, तुम्हारी ब-अदब, बेपर्दा दुनियाँ, तुम्हीं रख्खो।।

-Satish Thakur

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Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

काश उसने बता दिया होता, मोहब्बत अब भी है 'ठाकुर'।
हम अपनी मौत का सौदा यूँ सस्ते में नहीं करते ।।

-Satish Thakur

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

वो कहाँ इस दौर में जिंदा बचा 'ठाकुर'।
जिसको मुहब्बत एक से और दुश्मनी कईयों से हो।।

-Satish Thakur

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

हाँ वो बस एक जिद थी, जिद्दी नहीं है वो 'ठाकुर'।
पर कमबख्त जिद इतने बार की, की वो जिद्दी हो गए।।

-Satish Thakur

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

सवाल ये भी खूब था कि 'ठाकुर' जबाब क्या दोगे ।
हमनें कुछ न कहा, और वो लाजबाब हो गए।।

-Satish Thakur

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

उन्हें समझायें कैसे, कौन सी पुस्तक पढ़ें 'ठाकुर'।
वो जो खुद नासमझी की पुस्तक पढ़े बैठे हैं ।।

"सतीश ठाकुर"

धन्यवाद आप सभी को ।

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी धन्यवाद
3 महीना पहले

आप सभी का धन्यवाद

Satish Thakur मातृभारती सत्यापित कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी प्रेरक
3 महीना पहले

*📙सुंदरकांड के इस प्रसंग को अवश्य पढ़ें!⛳*

*"मैं न होता, तो क्या होता?”*

"अशोक वाटिका🌳" में जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा, तब हनुमान जी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये!

किन्तु, अगले ही क्षण, उन्हों ने देखा "मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया! यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?

बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता ? परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये, कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!

आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!" तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है, और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा!

जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये, तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता? पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !

*इसलिये सदैव याद रखें, कि संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान है! हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं! इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि...*
*मै न होता, तो क्या होता?*

*!! जय श्री राम !!*

🕉🙏🏻🌹

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