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"निसन्देह नहीं। भीख लेना और देना दोनों ही नहीं करना चाहिये।एक अकर्मण्यता बढाता है तो दूसरा अकर्मण्य लोगों को बढाता है। जब हम भीख देते हैं तो लेने वाला उस का गलत उपयोग करता है।इस धन से शराब खरीदता है,जुआ खेलता है,घरवालों से मारपीट करता है। यदि दान देना ही हो तो नकद न देकर उस भिक्षुक को भोजन वह भी अपने सामने कराया जाये, या उसे कोई रोजगार दिलवाया जावे ताकि वह भीख मांगना बन्द करे। हाँ,विध्यादानअवश्य करें।यदि आप में कोई हुनर होतो वह भी इन भिखारियों को सिखाया जा सकता है।बहुत से एसे मामले भी देखे हैं जिन में बच्चों व बड़ों का दिव्यांग का मेकप कर के भीख मन्गवाई जाती है।बच्चों की चोरियां भी इस फलते फूलते बिजनिस की वजह से बढ रही हैं।

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May Lord bless you on
this auspicious day of Easter,
and May it be a new beginning
of greater prosperity,
success and happiness.
Wish you a Happy Easter!!