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Satish Malviya बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ रात्रि
1 सप्ताह पहले

वो छिपाते हैं
पर बोल देती हैं आंखे
खरीदते हैं वो
पर मोल देती हैं आंखे
जाने कितने दर्द वो
ख़ुद में समाना चाहते हैं
उनके सारे भेद
पल में खोल देती हैं आंखे।

-Satish Malviya

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गलियों में गूंजते हुए उस शोर की कसम
मुझे वो कटी हुई पतंग नही चाहिए
बस कोई वो बीता हुआ बचपन लौटा दे

-Satish Malviya

नाराज़गी इस बात की नहीं
की वो हमारे ना हुए
अफ़सोस तो इसका है
कि वो किसी के ना हुए।

-Satish Malviya

कांटों पे चलते हुए, एक मखमली एहसास है दोस्ती
पानी में डूबते हुए
ना डूबने की आस है दोस्ती।
यूं तो बहुत रिश्ते है,निभाने को इस जिंदगी में
फ़िर भी इन रिश्तों में से, सबसे खास है दोस्ती
Happy Friendship 🤝 Day dear all Friends 😊

-Satish Malviya

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Satish Malviya बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 सप्ताह पहले

चंद सवाल हमारे ज़हन के दरवाज़े पर अक्सर खटखटाते हैं
फ़िर 🤔🤔🤔🤔
फ़िर क्या
तत्काल प्रभाव से हम
उन पर शायरियां बनाते हैं 😁😁😁

-Satish Malviya

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चंद सवाल हमारे ज़हन के दरवाज़े पर अक्सर खटखटाते हैं फ़िर
फ़िर क्या, तत्काल प्रभाव से हम
उन पे शायरियां बनाते हैं
#तत्काल

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Satish Malviya बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी प्रेरक
2 सप्ताह पहले

वो रोज़ की दुआ सलाम
कुछ दिनों से कम हो गई हैं
गूंजती थी गलियां ठहाकों से
वहीं कुछ आंखे नम हो गई हैं
माना कि लगातार हम सबकी
परेशानियां बढ़ रही हैं
ये महामारी नित दिन नए
कीर्तिमान गढ़ रही है
किन्तु इन मुश्किलों में भी
जो दे रहे अपने काम को बखूबी अंजाम
ऐसे कर्मवीर, साहसियों को
हमारी ओर से एक सलाम 👍👍
#सलाम

-Satish Malviya

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तुम्हारा ही हूं मैं सोचो,
तुम्हारा ही हूं मैं समझो
लिखावट में छुपी है जो,
मात्राओं को समझो
तेरे ही वास्ते नज़्में,
तेरे ही वास्ते नगमे
शब्दों में छुपी है जो,
वफाओं को ज़रा समझो।

-Satish Malviya

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उन फासलों को नापने की ज़रूरत भी ना पड़ी
क्योंकि बीच में सब सूना सा ख़ाली सा था।
मुश्किल तब नहीं थी जब वो छोड़ कर चल दिए
बुरा तो वो एहसास था जो बस ख़याली सा था।
#मुश्किल





-Satish Malviya

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क़लम की तो मुश्किल ही यही है
कि जब भी वो जस्बात लिखेगी
किसी ना किसी को , बुरा लगना ही है

#मुश्किल