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मेरे दिल पर तेरा एक और अहसान बाकी कर दे,
की अब के गिरूं तो उठाना नही...

हाय, मातृभारती पर मेरी इस कहानी 'ममता की छांव' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19868811/mamta-ki-chhav

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मौसम की तरह अब लोग बदलते है,
प्यार वही करते है, बस चेहरे बदलते है...

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एक मुठ्ठी बीज बिखेर दो , दिलों की ज़मीन पर,
के अब जब भी बारिश पड़े, तो मोहब्बत पनप जाए...

किसी रोज़ होगी रोशन, मेरी भी ज़िंदगी,
इंतजार सुबह का नही, तेरे लौट आने का है...

मैं आग हूं,
मैं राख हूं,
मैं पवित्र राष हूं..
मैं पंख हूं,
मैं श्वास हूं
मैं ही हाड़ मांस हूं..
मैं ही आदि, अनन्त हूं..
मैं शिव हूं..
मैं शिव हूं..
मैं शिव हूं....

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