Hey, I am reading on Matrubharti!

अच्छे वक़्तों की तम्मना में रही उम्र-ए-रवां,
वक़्त ऐसा था के बस नाज़ उठाते गुजरी..
ज़िन्दगी ख़ाक ना थी, ख़ाक उठाते गुजरी..
तुझसे क्या कहते तेरे पास जो आते गुजरी..

और पढ़े

भले ही आज तिरंगा मत लहराना,
पर कल जब तिरंगा जमीन पर मिले तो उसे जरूर उठाना..
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं..

और पढ़े

बेशक ये राखी की डोर इतनी मजबूत नही,
पर इससे जुड़ा बंधन अटूट है..
शायद कुछ दिन बाद ये फ़ीकी पड़ जाए,
पर इसमें चढ़ा ये प्रेम का रंग अमिट है..
ओर ये भी होगा कि एक दिन ये धागा नष्ट हो जाएगा,
पर इससे जुड़ा हर रिस्ता हमेशा रहेगा..
रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएं..

और पढ़े

यूँही मुस्कुराहटों को जोड़ जोड़ कर बनाई थी ख़ुशियों की चादर...
मेरी गम-ए-तन्हाई तो देखो इसे भी उड़ा ले गयी..

सावन बरसेगा प्रेम के रंग में,
रंगेंगे हम मेरे महादेव के संग में..🙏

आसान नही थी पर मुस्कुराते गुजरी,
लड़खड़ाते ही सही पर कदम बढ़ाते गुजरी..
साथ में ना सही पर तेरी याद में गुजरी,
ज़िन्दगी जीने में कम बस ख्वाब में गुजरी..

और पढ़े

दर्द कहाँ छुप पाते हैं दिल के लाख कोशिशें हों छुपाने की,
मासूम निग़ाहें झूठी मुस्कुराहट का हर दर्द बयां करती है...

और पढ़े

कुछ भावनाएं जो लफ्जों में बयां नहीं हो सकती..
उन्हें कागजों में बिखेरने की कोशिश करती हूं..
वो उदासी जो मेरी हंसी से छलक जाती है ...
उन्हें इन अल्फाजों में समेटने की कोशिश करती हूं...

और पढ़े

मोहब्बत बदल गयी इसके पैमाने बदल गए,
इश्क़-ए-वफ़ा के ज़मानें बदल गए...

छुपे है जो दर्द और दफन है जो राज
बन्द है तो लाख है खुल गए तो ख़ाक..