કોલેજકાળ દરમ્યાન ધણુ ધણુ જાણવાનુ અને અભિવ્યક્ત કરવાનુ જનૂન જાગેલુ.. ધીમે ધીમે અંદરથી હુ ઉધડતો રહ્યો જેમ મા પોતાના બાળકને જન્મ આપી ખુશ થાય એવી અનુભૂતી સર્જન જોઈ થઈ.. આપના પ્રતિભાવો મને જીવાડે છે કેમકે હુ મારા માટે જ લખુ છુ..!" 9870063267

*સારા માણસોની સંગતમાં હંમેશા ફાયદો જ થાય છે સાહેબ...*

*ફૂલો પરથી જો હવા પસાર થાય તો વાતાવરણ સુગંધી બની જાય છે.!!*

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વ્યક્તિના શરીરનો સૌથી ખૂબસુરત હિસ્સો દિલ છે,*

*અને તે જ સાફ ના હોય તો ચમકતો ચહેરો પણ કઈ કામનો નથી...*
- sabir

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#kavyotsav -2

(प्रेम)

तेरा मेरा क्या रिश्ता
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मैं बेचारी धरती और आप ऊंचा आकाश
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
एक दरिया बह रहा है
जिसका एक किनारा तुम और एक किनारा में
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
मैं जलती चिंगारी
और आप निर्मल जल
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
आप चढ़ता सूरज और मैं ढलती दोपहर
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
दुनिया में हर एक रिश्ते का नाम है
बस तेरा मेरा यह रिश्ता ही बेनाम है
समाज के बंधन रिश्तो की बेड़ियां ,
पूछ रही है हमसे
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
तुम चनाब की लहर और मैं कच्चा घड़ा
बताओ तेरा मेरा क्या रिश्ता
- sabirkhan

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#kavyotsav -2


खामोशी
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उसकी डाट सूनना बी
अच्छा लगता है
बहाना कोई भी
हो
दील को बहोत
सूकून मिलता है
उसको
लगता है
मै ताने देता हू
पर
वो ईतना बी नही
समजती
पगली
ये खामोशी जो
मुजे पिगला
देती है 
उसका मुजसे
रूबरु होना
करार मिल जाता है
दिल को.....!!!

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#kavyotsav -2

दुरी सी है..
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कुछ बातें अधूरी सी है
कुछ यादें अधूरी सी है

सुना है तू मेरे दिल में है
फिर कैसी ये दूरी सी है

एक हदमें बंधा दिल युं तो
तेरी आहटको मंजुरी सी हैं

सोचता हुं अधूरा में तेरे बगैर
तुजे देख हरकमी पुरीसी है

पनपने लगा मैं अब देख मुजे
आँसुओको जैसे सबूरी सी है

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#kavyotsav -2

ढलजा मेरे यार
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तु मेरी ग़ज़ल में बस जा मेरे यार
तु मेरी चाह में ढल जा मेरे यार..

जुड़ा हुं तेरे वजूद के सहारे मैं..
तु मेरा अस्क बन जा मेरे यार..

मै जी उठा लो फिर एक बार
तु मुझ में अब  बदल जा मेरे यार..

कोई नहीं इन तन्हा वीरानियां में
तु मेरी आंखों में पिघल जा मेरे यार...

कुछ खास समझने लगा हूं खुद को
सबब-ए-आरजू तु बन जा मेरे यार....

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#kavyotsav -2

ढलने के बाद

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सन्नाटे का शहर पिघलने के बाद

हलचल सी है दामन जलने के बाद



उदासी ने दम तोड़ा चौखट पे मेरी

घुंघट मे  छीपे चराग जलने के बाद



कौन आया ये बवंडर की रेत बैठ गई

चमक रहा आफताब निकलने के बाद



तेरे शहर से गुजरी होगी ठंड की लहरे

जी उठा मै तेरी खुश्बु से मिलने के बाद



आया हु राह में कुछ गुल बिखेरता हुवा

सूना है  वो आयेंगे श्याम ढलने के बाद

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हाय, मातृभारती पर इस धारावाहिक 'दास्तान-ऐ अश्क' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/5466/dastane-ashq-by-sabirkhan

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