लेखनी मेरा विस्तार ..(3) पुसतकों का प्रकाशन.. "एक मुसाफिर ऐसा भी" बाल ठाकरे,"नस बंदी से नोट बंदी तक"काव्य संग्रह,"विकास पथ नरेन्द्र मोदी"Biography तीनों पुस्तकें"amazon" पर उपलब्ध हैं। ebook.."एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर".coming soon new ebook... गजल़

"हाला में खुद डूबते हैं जमानें को दोष क्यों..
मतवाले प्याले टूटने, पर कब शोक मनाते हैं?"
#डॉरीना
#अनामिका
#हिंदी_शब्द
#हिंदी_का_विस्तार
#साहित्य_संगम

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"गुजरे हुए कल की कोई दवा ले आओ
मयकदा बहक गया है बिन पैमाने के"
#डॉरीना
#अनामिका
#हिंदी_शब्द
#हिंदी_का_विस्तार
#साहित्य_संगम

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"अपभ्रंश बगैर
शौरसेनी,पैशाची, ब्राचड़,खस,महाराष्ट्री,मागधी,का कहाँ हो सकता उत्थान"?
"आभीरों और मीणा की बोलियाँ भी हिंदी में पातीं हैं स्थान" ..
"हिंदी बगैर सरल नहीं,गणित,इतिहास,भूगोल और विज्ञान"
तो आओ करें हम सब मिलजुलकर #हिंदी_का_विस्तार
#अनामिका
#डॉरीना

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"हिंदी सिर्फ राष्ट्रीयता को नहीं जोड़ती है
अपितु वह सभ्यता और संस्कृति में भी सेतु का निर्माण करती है"..
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
#डॉरीना
#हिंदी_का_विस्तार

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"दुख मानव के अति महत्वाकांक्षा का सार है
इन्हीं किंचित कारणों से पलायन करता संसार है "
#अनामिका
#डॉरीना

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मन में संताप क्यों?
जीवन में उत्पात क्यों?
माना कि तेज बवंडर में
सबकुछ खो गया..
क्या जीवन यहीं
पूरा हो गया?
उद्विग्नता की घड़ी हो
परछाई दूर खडी़ हो
प्रहर बेखबर हो
प्रतित हो रहा दोपहर
हो..
कोई साथ न चले
ऐसा भी प्रहर हो
तिरोहित हर डगर हो
विवर्धन पथ तुम बनो
बढे चलो..
#अनामिका
#डॉरीना
#हिंदी_का_विस्तार

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कोई साथ चले नहीं
कोई पास रूके नहीं
फिर कैसी योजना ?
आशा की न घड़ी हो
निराशा उससे बड़ी हो
"मन में अटल संकल्पना"
क्या बिगाड़ लेगी बिडंबना.?
आंधी प्रलयंकारी हो
तूफां सबपर भारी हो
मन में भय हो प्रबल
सोच लो ये कल था
क्या आज तुम्हारा खो गया?
क्या जीवन पूरा हो गया?
#अनामिका
#डॉरीना
#हिंदी_का_विस्तार

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रिमझिम बरसात में तुलसी की चौपाईयाँ
कौशल्या हुलसकर हुलसकर कर ले रही रघुनंदन की बलईंया...
#अनामिका
#डॉरीना
#हिंदी_का_विस्तार
#जय_श्रीराम

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मानुष
मानव कब बना?
इसकी एक कहानी है
वर्षों गुजरे
कठिन तप सा
तुहिन कणों का
पानी है
मानसरोवर तब
तप भूमि थी
"वसुधा" पर
ऋषियों का मेला था
आया प्रलय का
भयंकर झोंका
दुर्गम
बर्फानी घाटी
में
सिर्फ
तब एक
मानव
अकेला
था
यह मनु था
या मानव
#अनामिका
#डॉरीना
#हिंदी_का_विस्तार

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शिक्षा,निरक्षरता और साक्षरता की वह कड़ी है जिससे समुदायिक एवं सामाजिक स्वरूपों में बदलाव लाया जा सकता है तथा एक मानव से दुसरे मानव तक सेतु निर्माण किया जा सकता है
#विश्व_साक्षरता_दिवस
#डॉरीना

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