करूं शब्द-शब्द मैं प्रीत की बातें, हाँ तुम मेरा आधार पिया, मैं जोगन कभी बैरागन बनती, और तुम मेरा संसार पिया।~ रूपकीबातें (Introvert Writer)

Roopanjali singh parmar verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ रात्रि
2 दिन पहले

कभी कभी महसूस होता है कि गुज़रे ज़माने के साथ, मैं भी गुज़र चुकी हूँ।
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2 दिन पहले

माँ जब आँगन में तुलसी की पूजा करती है..
तो मैं उसे देखा करती हूँ.. और सोचती हूँ ये घण्टों आँखें मूंदे आखिर ईश्वर से क्या माँगती है..
रसोई में घण्टों खाना पकाने के बाद माँ ने कभी नहीं कहा की वो थक गई है। शायद माँ थकान शब्द से परिचित ही नहीं है। मैंने उसे हमेशा ही मेरी रोटियों की गिनती ग़लत करते देखा है। ठीक वैसे ही जैसे वो अपनी आवश्यकताओं की गिनती नहीं रख पाती है। और फिर उलझन भरे भाव से कहती है.. "नहीं, मुझे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है"।
ये माँ कितना भी पढ़ी लिखी क्यों ना हो, हिसाब के मामले में बहुत कच्ची होती है।
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4 दिन पहले

मेरे रुख़सार पर नज़र उसकी बरकरार है,
जिस तरह से वो मुझे देखता है..
न मुझे करार है ना उसको करार है।
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4 दिन पहले

मुझे मोहब्बत में..
'वस्ल' और 'हिज्र' साथ नज़र आते हैं।
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4 दिन पहले

महिलाएं अपने जूड़े में केवल बालों को ही नहीं बाँधती,
वो बालों के साथ-साथ अनेक बार पुरुषों की वासना को भी बांध देती हैं, और इस तरह से भी, वो उस अभद्र नज़र का विरोध करती हैं।
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4 दिन पहले

प्रेमिका और पत्नी हमेशा से ही एक पुरुष के जीवन में अहम भूमिका निभाती हैं।
इनमें से एक पुरुष को प्रेम का अर्थ समझाती है, और एक कर्तव्यों का निर्वहन करना सिखाती है।
एक बताती है जीवन में सुख का क्या महत्व है, और एक दुःख में भी जीवन जीने की कला सिखाती है।
कह सकते हैं कि इन दोनों की ही भूमिका प्रेम के आधार और प्रेम के सार को प्रस्तुत करती है..
मगर फिर भी कहीं ना कहीं यह दोनों स्वयं को एक दूजे से कम आंकती हैं.. और एक दूसरे के स्थान को प्राप्त करना चाहती हैं.. जो कि ग़लत भी नहीं है।
प्रेमिका हमेशा स्वयं में पत्नी को खोजती है,
और पत्नी हमेशा स्वयं में प्रेमिका को खोजती है।
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4 दिन पहले

जब कोई दिल दुखाए तो ख़ामोश मत रहो,
किसी भी प्रकार के विचार को,
कभी खुद पर हावी मत करो।
क्योंकि मेरी नज़र में, शब्दों की नाराज़गी,
ख़ामोशी से बेहतर है।।
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Roopanjali singh parmar verified बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शुभ प्रभात
4 दिन पहले

थोड़े से सुख के लिए,
ज़िंदगी भर कष्ट उठाने से बेहतर है..
आज थोड़ा कष्ट उठाकर,
ज़िंदगी भर सुख से रहा जाए।
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4 दिन पहले

वो जो भटक रहे हैं दर-दर..
और मीलों बिन रुके चले जा रहे हैं..
भूख और प्यास दम घोंट रही है,
और थकान उनकी हिम्मत आजमा रही है।
इस ईद दुआ करो कि उनको इस कष्ट से राहत मिले।
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4 दिन पहले

मेरी ज़िंदगी के कुछ लम्हे इतने खूबसूरत थे,
जिन्हें मैंने मुट्ठी में कैद करने की भरसक कोशिश की..
मगर वो ऐसे गुज़रे जैसे..
समय की रेत फिसलती हुई।
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