जन्म ३ अगस्त को पड़रौना में | शोध -प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण कृतियाँ -मछलियाँ देखती हैं सपने ,दुःख-पतंग,जिंदगी के कागज पर,माया नहीं मनुष्य,जब मैं स्त्री हूँ , सिर्फ कागज पर नहीं,क्रांति है प्रेम,स्त्री है प्रकृति,खण्ड- खण्ड स्त्री , तुम्हें कुछ कहना है भर्तृहरि ,औरत के लिए ,कैसे लिखूँ उजली कहानी,अति सूधो स्नेह को मारग है,खुल जा सिमसिम, स्त्री और सेंसेक्स ,तुम करो पुण्य हम करें तो पाप,और मेघ बरसते रहे ,त्रिखंडिता –अम्बिका प्रसाद ,विजयदेव नारायण सम्मान.

कोई बाईट्स उपलब्ध नहीं है

कोई बाईट्स उपलब्ध नहीं है