માતૃભારતી પર રાકેશ ઠક્કરની ૪૮ પ્રકરણ સુધી ચાલેલી નવલકથા રેડલાઇટ બંગલોના ૧.૮૫ લાખથી વધુ ડાઉનલોડ થઇ ચૂક્યા છે ત્યારે નવી નવલકથા "લાઇમ લાઇટ" ને આથી વધુ પસંદ કરવામાં આવી છે. એક રહસ્યમય રૂપાળી યુવતીના હીરોઇન બનવાના સંઘર્ષ સાથે ફિલ્મી દુનિયાના અંધારાં-અજવાળાંની વાતો કરતી અને આ ક્ષેત્રના રાજકારણ, કાવા-દાવા, હવસ, પ્રેમ અને ઝગમગાટને આવરી લેતી આ નવલકથા સંપૂર્ણ કાલ્પનિક છે. અને કોઇ રોમાંચક, દિલધડક, રહસ્યમય ફિલ્મની જેમ તમને જકડી રાખશે એવી ખાતરી છે.

आईने के आगे खड़ी पत्नी ने अपने पति देव से पूछा :क्या मैं बहुत मोटी लग रही हूं?
पति ने सोचा और बेकार के झगड़े से बचने
के लिए कहा - बिल्कुल भी नहीं...!!!
पत्नी ने खुश होकर रोमांटिक होकर कहा -
ठीक है फिर मुझे अपनी बाहों में उठा कर फ्रिज तक ले चलो।
मैं आइसक्रीम खाऊंगी!
स्थिति को बेकाबू होते देख पति ने कहा -
रुक जा... मैं फ्रिज ही ले आता हूं...!!! 

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एक इसी उसूल पर गुजारी है जिंदगी मैंने जिसको अपना माना उसे कभी परखा नहीं

कुछ इस अदा से तोड़े है ताल्लुक उसने,
एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूं कसूर अपना 

महान वही बनता है, जिसे
'मैं' को 'हम' और 'तु' को 'आप' 
करना आता है

कैसे कोमल भाषा बोले
मन जब इतना अभिमानी है।।

कुछ नहीं बदला है क्या?, हाँ! तो बदल दो ये भी
साल-दर-साल सितम क्यों हैं पुराने वाले

डॉक्टर - चश्मा किसके लिए बनवाना है? 
पप्पू - टीचर के लिए। 
डॉक्टर - पर क्यों? 
पप्पू - क्योंकि उन्हें मैं हमेशा गधा ही नजर आता हूं...!!!

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बुरे वक़्त में कंधे पर रखा गया हाथ, कामयाबी पर तालियों से ज्यादा मूल्यवान होता है।
? सुप्रभात !आपका दिन मंगलमय हो?

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कल का युग हो जाइए, अगली सदी हो जाइए
बात यह सबसे बड़ी है, आदमी हो जाइए
गिरिराज शरण अग्रवाल

कर दिया मैंने दरकिनार मुझे
अब है थोड़ा बहुत क़रार मुझे
ध्रुव गुप्त