आस पास जो महसूस होता है बस उसे लिखने की कोशिश जारी है....

जिसके बारे में सोचा अच्छा ही सोचा मैंने
बुरे बन गए सभी ले लिए वो अलग बात है

-praveen singh

चुभती है किसी का किए हुए
फरेब की टीस हर वक्त दिल में

कि अच्छा इंसान भी बुरा बनने से
फिर परहेज नहीं करता है

-praveen singh

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praveen singh कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
11 महीना पहले

मेरी उम्र की कभी परवाह नही की
गुस्से में आ जाये माँ, तो मुझे थप्पड़ लगा देती थी

जब कभी किसी उलझन की वजह से
मैं परेशान रहने लगता था और
रात में मुझे नींद नही लगती थी

अपने आचंल मे, मेरा सर रखती थी
और मेरे सर पर अपना हाथ फेरते फेरते
ना जाने क्या जादू करती और मुझे सुला देती थी

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