नाम ; डॉ. प्रणव भारती  शैक्षणिक योग्यता ; एम. ए (अंग्रेज़ी,हिंदी) पी. एचडी (हिंदी) लेखन का प्रारंभ ; लगभग बारह वर्ष की उम्र से छुटपुट पत्र-पतिकाओं में लेखन जिसके बीच में 1968 से लगभग 15 वर्ष पठन-पाठन से कुछ कट सी गई  हिंदी में एम.ए ,पी. एचडी विवाहोपरांत गुजरात विद्यापीठ से किया       शिक्षा के साथ लेखन पुन:आरंभ  उपन्यास; ----------- -टच मी नॉट  -चक्र  -अपंग  -अंततोगत्वा  -महायोग ( धारावाहिक रूप से ,सत्रह अध्यायों में दिल्ली प्रेस से प्रकाशित ) -नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि  -गवाक्ष  -मायामृग  -शी डार

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
4 दिन पहले
Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
7 दिन पहले

तीसरी पीढ़ी  
अनुकंपा जगदीश 
दानी का आशीष !

डॉ. प्रणव भारती 

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
1 सप्ताह पहले

ज़िन्दगी की कहानी ,हमारी ज़बानी ,
न राजा है कोई, न ही कोई रानी | 
डॉ. प्रणव भारती

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
1 सप्ताह पहले

बसंत की बहार ,डोलें पक्षीगण डार-डार ,
कोकिला की तान देखो परत सुनाई दे | 
मंद,सुगंध ,शुचि शीतल समीर चले ,
तन-मन खेद हरे,अति सुखदाई है | | 
(स्व . श्रीमती दयावती देवी शास्त्री)            

माँ  डॉ. प्रणव भारती 

और पढ़े
Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
1 सप्ताह पहले

चार दिनों की यात्रा ,साढ़े तीन समाप्त ,
सबमें खुशियाँ बाँट दूँ,काहे का संताप ||  
डॉ. प्रणव भारती 

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
2 सप्ताह पहले

ऐ यात्री ! कैसे निकलेगा यात्रा पर तू
जब तेरे पैरों. में कंपन भरा हुआ है....
डॉ. प्रणव भारती 

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
2 सप्ताह पहले

संवेदन की पीठ पर मारीं छुरी अनेक ,
फिर भी खुद को मानते हो तुम बिलकुल नेक !
डॉ. प्रणव भारती 

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
2 सप्ताह पहले

मौन --केवल मौन 
---------------------
चाहती हूँ मौन से कुछ कर सकूँ संवाद 
कोई भी न हो मेरे आस-पास 
मौन केवल मौन हो ,मैं शब्दों की छुअन भर 
होंठ मेरे बंद हों ,मैं केवल उनका प्रत्युत्तर 
जीवन की तमाम रेखाएँ भाग्य सराहें 
छुट -पुट करते संबंधों को खूब निहारें
मौन को बस मौन से मैं पुकारूँ 
और त्रुटियों को मैं अपनी खुद सुधारूँ
जीवन की तमाम व्यथाएँ 
टूटी-फूटी सारी कथाएँ गुम  हो जाएं ,
बस मौन ही में कर दें खुलासा ,कौन हूँ मैं ?
मौन की अपनी कहानी 
मौन ही नयनों का पानी 
मौन कर लें हम नियंत्रण 
मौन का चुन लूँ मैं तृण तृण
बन सकूँ समिधा मौन की....
और यज्ञ में हूँ मैं समाहित 
कर सकूँ जीवन मैं अपना 
मौन को ही मैं समर्पित ।
डॉ. प्रणव भारती

और पढ़े
Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
4 सप्ताह पहले

सभी स्नेही पाठकों को ह्रदय से धन्यवाद 

जो है वो बहुत है ,जो नहीं है --क्यों चिंता ??






डॉ. प्रणव भारती 

Pranava Bharti verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी सुविचार
4 सप्ताह पहले

किसको तलाशता है तू गलियों में गाँव की | 
जब दिल के गाँव में बसेरा उसी का है ||   
डॉ. प्रणव भारती