Hey, I am on Matrubharti!

कोई मिला ही नहीं हमें कभी हमारा बन कर..

वो मिला भी तो बस एक किनारा बन कर..

हर ख्वाब बन कर टूटा है यहाँ,

बस अब इंतजार ही बचा है एक सहारा बन कर..!!

✍️ गीता परमार

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उस को "रांझा ना कहो जो ना हुआ फकीर..

जो ना बनीं जोगन तो फिर काहे की वो " हीर "..

- अज्ञात

वक्त नहीं है किसी के पास..

जब तक ना हो कोई मतलब खास..!!

✍️ गीता परमार..

जो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से,

भला वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने से..!!

✍️ गीता परमार..

रातों को आवारगी की आदत तो हम दोनों में थीं,

पर अफसोस की चाँद को ग्रहण और मुझे इश्क हो गया..!!

स्पर्श वो नहीं, जिसने
शरीर को पाया हो..

स्पर्श वो है, जिसने
रूह को गले लगाया हो..!!

✍️ गीता परमार..

बहुत सादगी से आहिस्ता आहिस्ता हो रहें हैं गुम..

तुम्हारे वादे, तुम्हारी कसमें, तुम्हारे रास्ते और तुम..!!

✍️ गीता परमार..

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जिसकी नियत में सच्चाई का स्वाद है...

वो काँटों में भी महकता हुआ गुलाब है...!!

✍️ गीता परमार..

किसी को सिर्फ चाहना ही
इश्क नहीं है,,, ?

सुबह शाम उसकी जान
खाना भी इश्क है,,, ?

??????

दर्द ए दिल खुल के सुना दूँ सबको

जी चाहता है कुछ ऐसा लिखु,

कि रुला दूँ सब को..!!

✍️ गीता परमार..