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प्रदेश के किनारे का एक छोटा-सा गाँव। कमरा भारी था। दीये जल रहे थे, पर उजाला नहीं...
मेरी बेटी अपर्णा सिंगापुर में कोई बीस वर्ष से रह रही है अतः यहाँ हर वर्ष आना होत...
चीनू एक भोली भाली लड़की है। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। कुछ ही दिनों पहले उसके...
शादी को दो दिन बीत चुके थे…लेकिन मयूर सर के मन में जैसे कोई बात ठहरी हुई थी…एक ऐ...
: 'ट्रिनिटी का उदय: शून्य का साम्राज्य'खन्ना टावर्स की तबाही के बाद का स...
भाग -1:शादी की उस रात, जब हर तरफ रौशनी थी, तब भी आयरा को लगा जैसे वो किसी अँधेरी...
अब आगे।।रिहान ने कॉल पिक किया,हेलो,रिहान ने कहा।सर,आपने जिनके बारे में मुझे पता...
सुबह हुई और रोज़ की तरह माया स्कूल गई — जैसे वह हर दिन जाती थी।लेकिन आज उसके मन...
स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' एक प्राइवेट इस्टेट - अग्निहोत्री मेंशनसमय: रात २:...
: : प्रकरण - 43 : : सुंदर काम करता था. उस से मुझे को...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई...
एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...
शीर्षक: स्टार-सेंटिनल्स: वल्चर के बाद[दृश्य 1 – शोक की धरती]वल्चर की शहादत के बाद शहर की रातें और भी लंबी हो गई थीं। टूटी हुई मूर्ति के सामने मोमबत्तियाँ जल रही थीं। हवा में एक अजी...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...
ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार काल्पनिक है . . . . लेखक -MASHAALLHA ये इस क...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
मुंबई कभी नहीं सोती. रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह. आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी. दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...
नष्ट होती पृथ्वी और जीवन के लिए संघर्ष करती मानव जाति। यह एक काल्पनिक कहानी है, जिसे मैंने बहुत सोच समझ कर लिखा है। लेकिन अगर समय रहते, प्रकृति को नहीं बचाया गया। तो भविष्य में...
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