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ये कहानी है उन शादीशुदा कपल्स की जो अपनी रोज़ मरह की जिंदगी से तंग आ चुके है रेल की पटरी की तरह चलते-चलते थक चुके है जो चाहते तो है अपनी जिंदगी में ज़ायका लाने के ...और पढ़े

माना कि मैं शादीशुदा मर्द हुँ तो क्या ख़्वाब भी न देखूँ.. रागिनी से मेरा रिश्ता दिलसे टुट चुका है पर फिर भी निभाए जा रहा हूँ सात फ़ेरोंके वचनोंको क्या कहीं मैंने प्यार पाने ...और पढ़े

मैं तो एक साधारन सी हाउस वाईफ हुँ, दो बच्चों की मॉम. भला मुझमें कोई क्यों इंटरेस्ट लेगा मेरा आत्मविश्वास दिनबदिन ढलता चला जा रहा था. और अब तो कोई उम्मीद भी नहीं बची थी. एमबीए करके ...और पढ़े

अपने मर्जी के बिना ज़िन्दगी जीना क्या होता हैं उसका तो कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता. पर जिये जा रहा हूँ बस्स...! खाली बोतल की तरह लुढ़कते जा रहा हूँ. उसे अब पानी से भर दो या शराब ...और पढ़े

बिना पीछे मुड़कर देख वहाँ से चली गयी. मॉम का हाथ पकड़कर चलते हुये उस वक्त मन में यहीं ख़याल आ रहा था कि, चाहें कुछ भी हो, कितना भी बुरा वक्त हम पर आए माँ-बाप कभी हमारा साथ ...और पढ़े

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