દુનિયામાં સૌથી મજબૂત અને સૌથી રહસ્યમય કંઈ હોય તો એ છે માનવ મન. માનવીના મનમાં ઉભરાતા, ઉછાળા મારતાં લાગણીઓના પુર જ નવી નવી ઘટનાઓ ઘટવાનું કારણ બને છે અને એને પેપર પર કંડારીને, આપની સમક્ષ એક વાર્તા રૂપે લઈ આવીશ હું... આપ એ વાર્તાને વાંચજો અને આપનો અમૂલ્ય પ્રતિભાવ ચોક્કસ આપજો.

एक मुद्दत से फासला कायम सिर्फ हमारे बीच ही क्यों
सबसे मिलता रहता हूं में सबसे मिलता तू भी है

अपने - अपने दिल के अंदर सिमटे हुए हैं हम दोनों
गुमसुम - गुमसुम मै भी, खोया - खोया तू भी है

- जगजीत सिंग

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કેટલાક ગીતની પંક્તિઓ જ્યારે યાદ આવે કંઇક અલગ જ ફિલીંગ આપી જાય..!

એક મસ્ત ગીત આજ બપોરનું મારા મનમાં ચાલી રહ્યું છે અને ગાવાનો હાલ સમય નથી... વિચારું છું એને લખીને અહીં કેદ કરી લઉં... પછી કદાચ મને સંભળાતું બંધ થઈ જાય..!

तू आता है सीने में, जब जब सांसे भरती हूं,
तेरे दिल की गलियों से में हर रोज गुजरती हूं...

हवा के जैसे चलता है तू, में रेत जैसे उड़ती हूं,
कौन तुझे यू प्यार करेगा, जैसे में करती हूं...

मेरी नजर का सफर, तुज पे ही आके रुके,
कहने को बाकी है क्या...? कहना था जो कह चुके
मेरी निगाहें है तेरी निगाहों पे तुजको खबर क्या, बेखबर

में तुझ से ही छुप छुप कर, तेरी आंखें पढ़ती हूं,
कौन तुझे यू प्यार करेगा जैसे में करती हूं....

આપ સૌને નિયતીના જય શ્રીકૃષ્ણ 🙏

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आसान राहें मैने कहां मांगी है,
जिद्द भी तो उसकी है…
जो मुकद्दर में लिखा ही नही..!!

यूं ही चले आना तुम मुझसे मिलने
जैसे सुरजकी किरने आ जाती हैं
में सो रही होती हूं तब भी जाग जाती हूं।

तुम भी यूहीं चले आना मुजसे मिलने
जैसे ठंडी हवाकी एक लहर दौड़ आती है
मेरे आंचल को छुके लौट जाती है।

तुम भी आजाना वैसे ही जैसे
वो नन्ही चिड़िया आ जाती है
खिड़की से पुकार कर मुझे बुला लेती है।

यूहीं चले आओना तुम भी मूजसे मिलने
जैसे ये काले घने बादल चले आते है
तेज धूपसे मुझे चाहे पलभर ही बचा जाते हैं।

तुम भी चले आओ ना यूहीं मुझसे मिलने
जैसे यूहीं कभी कभी एक मुस्कान चली आती है
मेरे चहेरे पर, बिना किसी वजह के।

तुम्हे मुज तक आनेके लिए किससे पूछना होगा?
रुको मत, सोचो मत बस अपने दिलकी सुनो
खुशियां भी क्या कभी पूछ कर दस्तक देती हैं!
©Niyatikapadia

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