દુનિયામાં સૌથી મજબૂત અને સૌથી રહસ્યમય કંઈ હોય તો એ છે માનવ મન. માનવીના મનમાં ઉભરાતા, ઉછાળા મારતાં લાગણીઓના પુર જ નવી નવી ઘટનાઓ ઘટવાનું કારણ બને છે અને એને પેપર પર કંડારીને, આપની સમક્ષ એક વાર્તા રૂપે લઈ આવીશ હું...આપ એ વાર્તાને વાંચજો અને આપનો અમૂલ્ય પ્રતિભાવ આપજો..

यूं ही चले आना तुम मुझसे मिलने
जैसे सुरजकी किरने आ जाती हैं
में सो रही होती हूं तब भी जाग जाती हूं।

तुम भी यूहीं चले आना मुजसे मिलने
जैसे ठंडी हवाकी एक लहर दौड़ आती है
मेरे आंचल को छुके लौट जाती है।

तुम भी आजाना वैसे ही जैसे
वो नन्ही चिड़िया आ जाती है
खिड़की से पुकार कर मुझे बुला लेती है।

यूहीं चले आओना तुम भी मूजसे मिलने
जैसे ये काले घने बादल चले आते है
तेज धूपसे मुझे चाहे पलभर ही बचा जाते हैं।

तुम भी चले आओ ना यूहीं मुझसे मिलने
जैसे यूहीं कभी कभी एक मुस्कान चली आती है
मेरे चहेरे पर, बिना किसी वजह के।

तुम्हे मुज तक आनेके लिए किससे पूछना होगा?
रुको मत, सोचो मत बस अपने दिलकी सुनो
खुशियां भी क्या कभी पूछ कर दस्तक देती हैं!
©Niyatikapadia

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